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मन, वचन और काय की सरलता ही आर्जव धर्म है-मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। जिस व्यक्ति के बोलने, सोचने और कार्य करने में वक्रता नहीं होती अर्थात कुटिलता (मायाचारी) नहीं होती। उसे ही आर्जव धर्म कीप्राप्ति होती है। मन, वचन और काय की सरलता का नाम आर्जव धर्म है। मायाचार रहित जीवन जीना है तो दर्पण, बालक और बांसुरी के समान जीवन जियो। व्यक्ति की छवि जैसी होती है, […]

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क्षमावाणी पर्व को राष्ट्रीय क्षमा दिवस घोषित करने की मांग

ललितपुर । जैन धर्म का क्षमावाणी पर्व आपस में कटुता कम करने, सौहार्द बढ़ाने एवं शांति स्थापित करने में कारागार स्थापित हो सकता है। शास्त्रों में लिखा है क्षमा वीरस्य भूषणम् अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है। अंतरात्मा से मांगी गई क्षमा हमें विनम्रता एवं सज्जनता के रास्ते पर ले जाती है। क्षमा के मूल में […]

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तीसरे दिन हुई उत्तम आर्जव धर्म की पूजा

आगरा। दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को जैन मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। श्री 1008 अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 चैत्यसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में भक्तों ने उत्तम आर्जव धर्म की पूजा और सभी मांगलिक क्रियाएं संगीतमय संपन्न कीं। […]

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छल-कपट का अभाव ही आर्जव धर्म है – आचार्य अतिवीर मुनि

रेवाड़ी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज ने दशलक्षण महापर्व के अवसर पर अतिशय क्षेत्र नसिया जी में आयोजित श्री तीस चौबीसी महामण्डल विधान में धर्म के तृतीय लक्षण उत्तम आर्जव की व्याख्या करते हुए कहा कि ऋजुता अर्थात् सरलता का नाम आर्जव है। मायाचारी कभी सफलता नहीं पा सकता, आत्म-कल्याण के लिए सरल […]

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मोक्षमार्ग की प्राप्ति के लिए सरल होना जरूरी – मुनि विशल्य सागर महाराज

झुमरी तिलैया (कोडरमा)। श्री दिगम्बर जैन समाज के सानिध्य में दशलक्षण पर्युषण का तीसरा दिन जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया। झुमरी तिलैया में चातुर्मास कर रहे महासंत जैन मुनि 108 विशल्य सागर गुरुदेव ने भक्तजनों को कहा कि कुटिल परिणामों का जहां पर त्याग किया जाता है, वहीं पर आर्जव धर्म […]

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दूसरों की बुराई नहीं, अपने को देखने में ही धर्मः उचय मुनि सुधासागर महाराज

ललितपुर। स्थानीय क्षेत्रपाल मंदिर में पर्वराज पर्यूषण पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि सुधासागर महाराज ने कहा है कि जीवन को ऐसा बनाएं कि कोई दो बातें कहकर हल्का हो जाए। दूसरों की बुराई नहीं, अपने को देखने में ही धर्म है। जिसे मन को समझने की इच्छा आ गई तो समझो उसमें धर्म को […]

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जीवन में कुटिलता को छोड़कर सरलता को धारण करें – आचार्य वर्द्धमान सागर महाराज

महावीर जी। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महावीर जी ने दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म के बारे दिवस बताया कि क्रोध छोड़ने से क्षमा धर्म प्रकट होता है, मान छोड़ने से मार्दव धर्म प्रकट होता है, इसी प्रकार मायाचारी छोड़ने से आर्जव धर्म प्रकट होता है। आर्जव धर्म का सरल आशय […]

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भाव के बिना पूजा व्यर्थ है- आचार्य सुंदर सागर जी महाराज

प्रतापगढ़ । केवल मंदिर में आना धर्म नहीं है। मंदिर में आकर पूजा करना क्रिया मात्र है। जब तक उसमें भाव नहीं है, यह पूजा व्यर्थ है। आपका मंदिर में आकर इस थाली से आकर उस थाली में द्रव्य चढ़ाने का कोई अर्थ नहीं है। जो भगवान निरंजन हैं, उन्हें आपके जल चढ़ाने की आवश्यकता नहीं […]

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अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है – विधानाचार्य संदीप जैन संगम अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है विधानाचार्य संदीप जैन संगम

अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है – विधानाचार्य संदीप जैन संगम अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है – विधानाचार्य संदीप जैन संगम* काठमांडू श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी काठमांडू नेपाल में चल रहे दश लक्षण महापर्व में विधानाचार्य संदीप जैन संगम साहित्याचार्य जी अंबाला द्वारा शायं शास्त्र […]

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मृदुता का भाव मार्दव धर्म है लोकेश शास्त्री

मृदुता का भाव मार्दव धर्म है लोकेश शास्त्री रामगंजमंडी 10 लक्षण पर्व की बेला में तृतीय दिवस को उत्तम आज आर्जव रूप में मनाया गया बेला में शहर के प्रमुख मंदिरों में अभिषेक,पूजन शान्तिधारा की गई। इस बेला में लोकेश शास्त्री द्वारा तत्वार्थ सूत्र का तीसरे अध्याय का अर्थ कर समझाया गया। साथ ही रात्रि […]

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दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा, शाम को मंदिरों में हो रही मंगल आरती

दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा, शाम को मंदिरों में हो रही मंगल आरती आगरा दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को जैन मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया| श्री 1008 अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में परम पूज्य आचार्य […]

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वात्सलय वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के जन्म दिवस पर विशेष

वात्सलय वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के जन्म दिवस पर विशेषश्री शांति सिंधु सी निर्भयताहो वीर सिंधु सी निर्मलताश्री शिव सागर जी सा अनुशासनहो धर्म सिंधु सी निस्पहतासंयत वाणी चिंतन शक्तिहो अजित सुरिवर सी दृढ़ताइन गुणों का संचय होवर्द्धित हो मन की मृदुताहो मार्ग आपका निष्कंटकयशवती बने यह परम्परा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी […]

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दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन -गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में पदमपुरा में मनाया वीतराग धर्म का उत्तम आर्जव लक्षण -श्रावक संस्कार साधना शिविर में उमड़े श्रद्धालु- शनिवार 03 सितम्बर को मनाया जावेगा वीतराग धर्म का उत्तम शौच लक्षण

जैन धर्म के सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का गर्भ कल्याणक दिवस मनाया –उत्तम आर्जव रीति बखानी, रंचक दगा बहुत दुखदानी -दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन -गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में पदमपुरा में मनाया वीतराग धर्म का उत्तम आर्जव लक्षण -श्रावक संस्कार साधना शिविर में उमड़े श्रद्धालु- शनिवार 03 सितम्बर को मनाया […]

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दूसरों को ठगने वाला स्वयं ठग जाता है : आर्यिका विज्ञाश्री

दूसरों को ठगने वाला स्वयं ठग जाता है : आर्यिका विज्ञाश्री निवाई बडा़ जैन मंदिर, नसियां जैन मंदिर, बंपुई वाले चैत्यालय, शिवाजी कालोनी पार्श्वनाथ जैन मंदिर, शांतिनाथ जैन मंदिर सहित बिचला जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने पर्युषण पर्व के चलते गाजेबाजे के साथ उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा अर्चना की गई। चातुर्मास कमेटी के […]

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जीवन में कुटिलता को छोड़कर सरलता को धारण करें वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी

जीवन में कुटिलता को छोड़कर सरलता को धारण करेंवात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी श्री महावीर जी वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने महावीर जी में दश लक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म के दिवस बताया कि क्रोध छोड़ने से क्षमा धर्म प्रकट होता है ,मान छोड़ने से मार्दव धर्म […]

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आपाधापी व व्यस्तता भरे जीवन मे सरलता खो गयी है, जिसे ढूढ़ने की आवश्यकता है आचार्य विनीत सागर

आपाधापी व व्यस्तता भरे जीवन मे सरलता खो गयी है, जिसे ढूढ़ने की आवश्यकता है आचार्य विनीत सागर कामा के कोट ऊपर स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा आराधना करते समय आचार्य विनीत सागर महाराज ने कहा की आर्जव यानी सरलता है अर्थात कुटिलता व […]

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तजो मान तभी बन पाओगे भगवान- मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। मान महा विष रूप करहि नीच गति जगत में अर्थात मान के मद में मदहोश व्यक्ति किसी को कुछ नहीं समझता। उसे ज्ञान का भी भान नहीं होता और वह इस कर्तत्व भाव में जीता है कि सबका में ही कर्ता हूं। घर संसार सब मैं ही चला रहा हूं, यह उसका भ्रम है। […]

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अहंकार का नाश करना मार्दव धर्म- मुनिश्री निरीह सागर

ललितपुर। धर्मनगरी व ग्यारह जिनालयों की नगरी वर्णीनगर मडा़वरा में पर्वों में श्रेष्ठ पर्वराज पर्यूषण पर्व के द्वितीय दिन उत्तम मार्दव धर्म के अवसर पर नगर के जिनालयों में प्रात:काल श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, दशलक्षण विधान आदि धार्मिक क्रियाएं श्रावकों ने विधि-विधान पूर्वक सम्पन्न कीं। आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य अष्टम् निर्यापक […]

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मृदुता अर्थात कोमलता का नाम मार्दव है, मान (अहंकार) के अभाव में ही मार्दव धर्म प्रकट होता है – आचार्य अतिवीर मुनिराज

रेवाड़ी। जो मनस्वी पुरुष कुल, रूप, जाति, बुद्धि, तप, शास्त्र और शीलादि के विषयों में घमंड नहीं करता, उसका मार्दव धर्म होता है। जब तक मार्दव धर्म के विपरीत मान विद्यमान है तब तक वह मार्दव धर्म को प्रकट नहीं होने देता। मृदुता अर्थात् कोमलता का नाम मार्दव है और मान (अहंकार) के अभाव में ही […]

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राजधानी जयपुर में श्रमण मार्तण्ड गुरुदेव के वरदहस्त से किया जीवन व मरण सफल-

राजधानी जयपुर में श्रमण मार्तण्ड गुरुदेव के वरदहस्त से किया जीवन व मरण सफल- जयपुर राजस्थान की राजधानी में वर्षायोगरत राष्ट्र गौरव चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुराज जिनकी अनुकम्पा से हजारो हजार भव्यात्मन अपना आत्मकल्याण कर रहे है। श्री मधोक जैन चितरी ने बताया की इसी श्रंखला में जयपुर निवासी वयोवृद्ध गुलाब देवी जी […]

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