अहंकार का नाश करना मार्दव धर्म- मुनिश्री निरीह सागर

JAIN SANT NEWS ललितपुर

ललितपुर। धर्मनगरी व ग्यारह जिनालयों की नगरी वर्णीनगर मडा़वरा में पर्वों में श्रेष्ठ पर्वराज पर्यूषण पर्व के द्वितीय दिन उत्तम मार्दव धर्म के अवसर पर नगर के जिनालयों में प्रात:काल श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, दशलक्षण विधान आदि धार्मिक क्रियाएं श्रावकों ने विधि-विधान पूर्वक सम्पन्न कीं। आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के शिष्य अष्टम् निर्यापक मुनिश्री अभय सागर, मुनिश्री प्रभात सागर, मुनिश्री निरीह सागर महाराज का ससंघ का पावन वर्षायोग नगर की ह्रदय स्थली श्री महावीर विद्याविहार के परिसर में चल रहा है। मुनिश्री ससंघ के पावन सानिध्य में दैनिक नित्य क्रियाओं में प्रात: श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, दोपहर में दशलक्षण विधान, तत्वार्थसूत्र का वाचन आदि धार्मिक क्रियाएं आयोजित हो रही हैं। श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य चौधरी अभिनंदन जैन, अरिहंत, यश जैन परिवार ने प्राप्त किया। मुनिश्री ससंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र, ओम जैन कुम्हैडी, सिंघई कन्छेदी लाल, सुनील कुमार, अनिल कुमार, डॉ. वीरेंद्र जैन, डॉ. नीरज जैन धवा परिवार, दीपा जैन खुटगुंवा परिवार ने प्राप्त किया। इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री निरीह सागर महाराज ने कहा कि जो ज्ञानी कुल, रूप, जाति, बुद्धि, तप, शास्त्र, शीलादि के विषय में किंचित मात्र भी घमंड नहीं करता है, वह मार्दव धर्म का पालन करता है। आधि, व्याधि से दूर समाधि की यात्रा करने का दिन उत्तम मार्दव है। मृदुता और व्यवहार में विनम्रता को धारण करके ही मार्दव धर्म का पालन कर सकते हैं। व्यक्ति को मान कषाय के कारण अभिमान प्रकट होता है। जाति, कुल, वैभव,प्रभुत्व, ऐश्वर्य संबंधी अभिमान मद कहलाता है। इन्हें विनश्वर समझकर मान-कषाय को जीतना उत्तम मार्दव धर्म है। अहंकार का नाश करना ही उत्तम मार्दव धर्म है। मार्दव धर्म हमें नम्रता सिखाता है। नम्रता से ही मानव की पहचान होती है। इस दौरान सकल दिगम्बर जैन समाज मडा़वरा के श्रावकगण एवं नगर में संचालित स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारीगण मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश सिंघई, प्रदीप जैन खुटगुंवा ने संयुक्त रुप से किया। चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश जैन सिंघई ने दशलक्षण पर्व की जानकारी देते हुए बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम चातुर्मास समिति के मंत्री राजेश सौंरया, प्रदीप जैन खुटगुंवा, प्रवीण जैन एवं आचार्य विद्यासागर संस्कार वर्णी पाठशाला की प्राचार्या ममता जैन के निर्देशन में आयोजित किए जा रहे हैं। रात्रि में श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के विद्वान दीपक जैन द्वारा दशलक्षण महापर्व पर विशेष प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं।

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