दूसरों को ठगने वाला स्वयं ठग जाता है : आर्यिका विज्ञाश्री
निवाई
बडा़ जैन मंदिर, नसियां जैन मंदिर, बंपुई वाले चैत्यालय, शिवाजी कालोनी पार्श्वनाथ जैन मंदिर, शांतिनाथ जैन मंदिर सहित बिचला जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने पर्युषण पर्व के चलते गाजेबाजे के साथ उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा अर्चना की गई। चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता विमल जौंला व राकेश संधी ने बताया कि दशलक्षण धर्म में शुक्रवार को तीसरे दिन सभी जैन जिनालयों मे उत्तम आर्रजव धर्म की पूजा अर्चना के साथ अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें महिला मण्डल ने एंकाकी नाटिका की प्रस्तुति दी। विमल जौंला व प्रतीक जैन ने बताया कि शुक्रवार को आर्यिका विज्ञा श्री माताजी के सानिध्य में दशलक्षण मण्डल विधान मे उत्तम आर्जव धर्म की रचना करके समवशरण रचाया जिसमें देवशास्त्र गुरु के साथ दशलक्षण मण्डल विधान की विशेष आराधना की। मीडिया प्रभारी विमल जौंला व राकेश संधी एवं प्रतीक जैन ने बताया कि बिचला जैन मंदिर में मंदिर कमेटी के विमल पाटनी व राकेश संधी सहित कई श्रद्धालुओं द्वारा भगवान आदीनाथ अजीतनाथ संभवनाथ पदमप्रभु सुपार्श्वनाथ चंद्र प्रभु शांतिनाथ मुनिसुव्रतनाथ नेमीनाथ पार्श्वनाथ एवं महावीर भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा करके पूजा अर्चना की। इस अवसर पर शांतिनाथ जैन मंदिर में गणिनी आर्यिका विज्ञा श्री माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि मन-वचन- काय की सरलता का नाम आर्जव है। योगों की वक्रता न होना ही आर्जव धर्म है साधना का आधार-बिन्दु है आर्जव धर्म आर्जव को नष्ट करने वाली है माया कषाय। यह माया, कषाय रूपी पिता की तीसरी संतान है। कषाय की चार संतान में क्रोध, मान और लोभ तो लड़के हैं, पर माया लड़की है। माया कन्या है और कन्या की विशेषता है कि वह एक घर ही नहीं, दो घर की होती है उसी प्रकार माया भी एक घर की नहीं दो घर की होती है। बाहर कुछ और भीतर कुछ और होती है इसलिये वह स्वयं ठगाई जाती है और दूसरों को भी ठगने का प्रयास करती है। माताजी ने कहा कि घर व मंदिर में मन-वचन- काय एक हो ऐसा न हो कि मायाचारी, छल, कपट करना स्वयं को धोखा देना है। कपट अविश्वास को पैदा कर देता है। बगुला भक्ति नहीं वास्तविक भक्ति करो। जहाँ वक्रता है वहाँ धर्म नहीं। जहां सरलता है वहीं धर्म है। धर्म में टेढ़ापन नहीं सरलपना होता है। मायाचारी करने वाले गाय, घोड़ा, हाथी, गधा, कुत्ता, बिल्ली, सर्प आदि पशु बनते हैं। दूसरों को ठगने वाला स्वयं ठग जाता है। माया को ठगिनी की संज्ञा दी गई है। विनय से व्यक्ति ऊंचाई को प्राप्त करता है। अतः मायाचारी को छोड़ना ही हमारी उन्नति है। जौंला ने बताया कि सभी जैन मंदिरों में पर्युषण पर्व के दौरान शनिवार को दशलक्षण धर्म के तहत उत्तम सत्य धर्म की पूजा अर्चना की जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
