ललितपुर । जैन धर्म का क्षमावाणी पर्व आपस में कटुता कम करने, सौहार्द बढ़ाने एवं शांति स्थापित करने में कारागार स्थापित हो सकता है। शास्त्रों में लिखा है क्षमा वीरस्य भूषणम् अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है। अंतरात्मा से मांगी गई क्षमा हमें विनम्रता एवं सज्जनता के रास्ते पर ले जाती है। क्षमा के मूल में कल्याण एवं निहित की भावना सक्रिय रहती है तथा क्षमा की भावना से ही मनुष्य ऊंचा उठता है। इसीलिए प्रधानमंत्री से क्षमावाणी पर्व को राष्ट्रीय क्षमा दिवस घोषित करने की मांग झारखंड, हजारीबाग कमल जैन विनायका ने की। हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने संसद में सदस्यों से मिच्छामी दुक्कड़म कहकर क्षमा याचना की है। ऐसे में पूरे वर्ष में हर व्यक्ति द्वारा जाने-अनजाने में हुई भूलों की क्षमा मांगने का यह पर्व हमें अवसर देता है। इसीलिए क्षमावाणी पर्व को क्षमा दिवस घोषित किया जाए।
