त्याग न हो स्वयं के यश या ख्याति के लिए – आचार्य श्री वर्द्धमान सागर महाराज
श्री महावीरजी। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में विराजमान वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टा धीश आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी ने दशलक्षण धर्म के अंतर्गत आठवें दिन त्याग धर्म की विवेचना की। उन्होंने कहा कि आज दशलक्षण महापर्व का 8वां दिन है। आठ का अंक यह संदेश देता है कि हमें 8 कर्मों का […]
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