
ललितपुर। धर्मनगरी वर्णीनगर मडा़वरा में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर नगर में विराजमान आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य अष्टम् निर्यापक मुनिश्री अभय सागर, मुनिश्री प्रभात सागर, मुनिश्री निरीह सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्री महावीर विद्या विहार के परिसर में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, संगीतमयी पूजन श्रद्धालुओं ने किया। श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रो. रमेशचंद्र जैन, डॉ. अभिषेक जैन, वैदिक जैन, कमलेश बजाज, दिवाकर बजाज परिवार को प्राप्त हुआ। श्रावक श्रेष्ठी बनने का सौभाग्य महेंद्र जैन, मोनू जैन पठा के लिए प्राप्त हुआ। मुनिश्री ससंघ को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य पं. संतोष शास्त्री, शिक्षक संभव जैन, पं. दीपक जैन, नीलेश जैन दुकान वाले, शिखरचंद्र, अनिल कुमार, एड. मनोज जैन दुकान वाले, राजकुमार, रोहित जैन डोंगरा परिवार, अशोक जैन मेडिकल परिवार को प्राप्त हुआ। दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन श्रमण मुनिश्री निरीह सागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म के बारे में कहा कि त्याग के माध्यम से जीवन की उन्नति और विकास होता है। जब तक पर का संबंध लगा रहता है, तब तक हम धर्म को ग्रहण नहीं कर सकते। जैसे-जैसे पर वस्तु का त्याग करते जाते हैं, वैसे वैसे जीवन की उन्नति होती चली जाती हैं। त्याग में सुख है, राग में दु:ख है। इसलिए हमें त्याग धर्म को सुनकर कुछ न कुछ त्याग करने का विचार करना चाहिए। दूसरे शब्दों में छोड़ने का नाम त्याग है। बिना किसी अपेक्षा के दिया गया दान किया गया त्याग हमें महान बनाता है। मोक्ष शास्त्र का वाचन प्रियांशी जैन,सुप्रिया जैन, सलोनी जैन,प्रतीक जैन ने किया।
दोपहर में तत्वार्थ सूत्र के आठवें अध्याय की अर्थ सहित व्याख्या परम पूज्य श्रमण मुनिश्री अभय सागर महाराज ने की। सायंकाल संगीतमयी आरती पं. गजेंद्र जैन सौंरया, धर्मेंद्र जैन सराफ के निर्देशन में आयोजित की गई। तत्पश्चात रात्रि श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर से आए प्रो. दीपक शास्त्री के उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन हुए। रात्रि में संस्कृति सराफ के निर्देशन में “पाश्चात्य सभ्यता” का प्रभाव नाटिका का मंचन किया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश जैन सिंघई एवं मंत्री राजेश जैन सौंरया ने किया।
