
इंदौर। एक गृहस्थ होकर साधु सा जीवन जीना कल्पना से परे लगता है लेकिन समोसरण मंदिर, कंचन बाग में पर्युषण पर्व के उपलक्ष्य एवं मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी और मुनि श्री सहज सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में 31 अगस्त से चल रहे 10 दिवसीय श्रुत आराधना साधना शिविर में भाग ले रहे 185 शिविरार्थी अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण कर धर्म के 10 लक्षणों की साधना कर रहे हैं। इस दौरान वह साधु जैसी चर्या करते हुए जीवन व्यतीत कर अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
चातुर्मास संयोजक आजाद जैन, टी के वेद और सी ए अशोक खासगीवाला ने मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू को बताया कि शिविर में इंदौर, भोपाल, सागर, सिवनी, भीलवाड़ा, भिंड, सूरत, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित कई स्थानों के शिविरार्थी हैं। चातुर्मास समिति के एक प्रमुख सदस्य हंसमुख गांधी ने बताया कि शिविर में 25 वर्ष से 90 वर्ष तक की आयु के शिविरार्थी सम्मिलित हैं। उनके आवास, एवं शुद्ध भोजन आदि की निशुल्क व्यवस्था समिति ने की है एवं प्रत्येक शिविरार्थी को धर्म साधना में सहायक एक किट (बैग) दी गई है, जिसमें स्वाध्याय एवं पूजा विधान के लिए पुस्तक, जाप देने के लिए माला, महिलाओं को पहनने के लिए दो साड़ी, पुरुषों के पहनने के लिए दो धोती दुपट्टे, शुद्धि के लिए प्राशुक जल के लिए स्टील की एक केटली, बैठने एवं विश्राम के लिए दो चटाई एवं पेन कॉपी है। शिविर में भाग ले रहे सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर के पूर्व कार्याध्यक्ष पदम काला (66) इंदौर ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि ध्यान, देव दर्शन, सामूहिक अभिषेक पूजन, मुनि श्री के प्रवचन, सामयिक और प्रतिक्रमण आदि क्रियाओं के माध्यम से धर्म के परिपेक्ष में आध्यात्मिक सामाजिक कर्तव्य समझने को मिल रहा है और हमारे भावों की विशुद्धि बढ़ रही है।
शिविरार्थी ममता खासगी वाला ने बताया कि मुनिश्री की प्रेरणा एवं प्रवचन से शिविरार्थीयों को धर्म मय ढोंग का नहीं, ढंग का जीवन जीने की शिक्षा मिल रही है।
शिविरार्थियों की दिन चर्या
सभी शिविरार्थी प्रातः 4:30 बजे उठकर 9 बार णमोकार मंत्र का पाठ करते हैं। उसके बाद बिना साबुन स्नान कर तेल-कंघे के बगैर तैयार होकर 4:50 से 5:00 बजे तक सुप्रभात स्तोत्र, 5:10 से सामूहिक ध्यान करते हैं।
6:15 से 10:30 तक सामूहिक देव दर्शन, अभिषेक, पूजन, मुनि श्री के प्रवचन श्रवण का लाभ लेते हैं। तत्पश्चात 10:45 से 12:00 बजे तक भोजन करते हैं, जिसमें जमीकंद और पत्तेदार सब्जियां नहीं होतीं।
भोजन पश्चात 1 घंटे का मौन 1:30 से 2:15 आदि वीर शंकर स्तोत्र, तत्वार्थ सूत्र पर मुनि श्री के प्रवचन होते हैं। संध्या 4:30 से 5: 30 तक जिन्हें आवश्यक है, उन्हें दूध एवं फलाहार दिया जाता है। प्रायः अधिकांश शिविरार्थी एक समय भोजन ही करते हैं और कुछ उपवास रखते हैं। सभी के लिए 10 दिन तक मोबाइल एवं चप्पल-जूते का उपयोग वर्जित है। सभी शिविरार्थी संध्या 6:00 बजे से 9:00 बजे तक गुरु भक्ति, सामयिक, प्रतिक्रमण, आरती एवं स्वाध्याय करने के पश्चात अपनी-अपनी चटाइयों पर प्रभु का स्मरण करते हुए शयन करते हैं।
