राजधानी जयपुर में सिंह निष्क्रीडित महाव्रत की कठोर साधना-
जयपुर
भारत गौरव चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनीलसागर जी यतिराज के सुशिष्य पूज्य मुनि श्री सुज्ञेय सागर जी गुरुदेव जैन धर्म के कठोर व्रत तपोसाधना मे से एक “सिंह निष्क्रीडित महाव्रत” की साधना पर पूज्य आचार्य श्री की पावन अनुकम्पा में अग्रसर है

मुनि श्री सुज्ञेय सागर जी गुरुदेव पूज्य आचार्य श्री के शुभाशीष, वात्सल्य व मंगल प्रेरणा से इस महाव्रत को सानन्द सम्पन्न कर रहै है।*
श्री मधोक जैन चितरी के अनुसार आचार्य भगवन्त के अनेक शिष्य रत्नों मे से पूज्य युवा मुनि श्री सुमंत्र सागर जी महाराज हिम्मतनगर में अनवरत 85 वे उपवास,एवम पूज्य युवा मुनि श्री सुयत्न सागर जी महाराज णमोकार मंत्र के 35 उपवास कर रहे है। इतना ही नही श्री संघ के अनेक सन्त सोलहकारण से लेकर दसलक्षण उपवास की साधना कर रहे है।
साथ ही हमारे भारतवर्ष की भूमि पर जो जो भी साधु परमेष्ठी भगवान व्रत उपवास की साधना कर रहे है उन सबके चरणों मे नमन करते हुए कोटि कोटि अनुमोदना।
यही कहूंगा
आओ इन्हें भी वन्दन कर ले
ये चलते फिरते तीरथ है
समता रस मूरत है
स्वातम चिनमूरत है
है धन्य धन्य महिमा तेरी तम हरने वाले सूरज हो
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
