विद्याधर से विद्यासागर

शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 ममता और वात्सल्य की मूर्ति माने जाने वाले एक सेठजी ब्रह्मचारी विद्याधर की धोती पर दृष्टि रोपे थे। वे रोज दर्शनोपरान्त सोचते कि ब्रह्मचारी विद्याधरजी यह मोटी धोती हटाकर उनके द्वारा लायी गयी फाइन (अच्छी) धोती धारण कर लेते तो अच्छा रहता। वे जो ‘फाइन’ धोती लाये थे, कीमती थी, कोमल […]

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विद्याधर से विद्यासागर

शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 नटहलस्वीकृतनभेंट: हृष्ट-पुष्ट, गोरे- चिट्ठे, विनम्र, लजीले युवक को ब्रह्मचारी वेष में देखकर सभी का जी जुड़ाता था जिसका जी जुड़ाता वह आपोआप विद्याधर की बड़ी-बड़ी आँखों से भी जुड़ जाता था। लोग घर पहुँचकर कमल की तरह खिलते हँसते उनके नेत्रों को क्षणभर भी न भूल पाते। हर माता-पिता अपने पुत्र […]

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विद्याधर से विद्यासागर

शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 वहअध्ययनशीलशिष्य : एक दिन विद्या की प्यासी दृष्टि ज्ञानसागरजी के देह के भूगोल को, दक्षिणध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर पढ़ती हुई रुक गई उनके नेत्रों पर जाकर गुरु ने भी विद्या के नेत्र देखे। देखकर उन नेत्रों की चाह समझने की कोशिश करने लगे। उनने उन मोतियों में देखा कि […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 यहवैद्यहैयाजादूगर- सेवा और संकल्प की गंगा बह पड़ी अजमेर की उस नसियाँ केप्रांगण से। देखने-समझने वाले बतलाते कि गुरुभक्ति की ऐसी मिसाल कहीं अन्य देखने नहीं मिली। मगर विद्या को तो मिसाल बनने / बनाने से कोई प्रयोजन न था। वे तो अपने पथ पर थे। बस उस पथ पर रहकर […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 आत्माकीअनुगूँज : “मुझे पढ़ना हैं। मुझे कुछ सीखना है। मुझे कुछ कहना है मुझे कुछ खोजना है। मुझे साहित्य जानना है। साहित्य का वैभव पहचानना है। मुझे व्याकरण के आधार बिन्दु जानना है मुझे संस्कृत भाषा में परिपक्व होना है। मुझे अपभ्रंश बोली के संकेत देखना है। मुझे आत्म विकास करना […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 सदलगाकामोह-राग : श्रवणबेलगोला की शीतांश हवाएँ चल कर सदलगा के मंदिरों से टकराई। मंदिर में जनकंठ मुखरित हो पड़े- विद्या उत्तर की ओर चला गया ! समाचार मंदिरों से घर-दर-घर फैल गया। सदलगा के लोगों पर बेलगोला का जादू कम सा हो पड़ा, वहाँ जब विद्या नहीं तो ? मारुति, राजकुमार, […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 विद्याधर पढ़ने-लिखने सीखने में बचपन से ही होशियार थे। कुशाग्र बुद्धि। उन्होंने अपने ज्ञान और विवेक जन्य श्रम से मुनि ज्ञानसागर को ऐसा प्रभावित किया कि मुनि श्री अपने अंतस् का संपूर्ण अध्यात्म, संपूर्ण साहित्य, संपूर्ण ज्ञान उनके हृदय रूपी गमले में उड़ेल देना चाहने लगे। उनके सान्निध्य में विद्याधर नित-नवीन […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 सुबह दोनों को तड़के उठने की आदत थी। दोनों उठे भी और अपने-अपने कार्य में लग गये। कजौड़ीमलजी ज्ञानसागरजी के दर्शन कर बैठ ही रहे थे कि उन्होंने पूछ लिया। क्यों, ध्यान दिया था रात में? दिया था, महाराज मैं जितनी बार उठा, वे मुझे जागते-पढ़ते ही मिले। अच्छा ध्यान लगता […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 एक दिन गुरु ज्ञानसागरजी ने पूछा कजौड़ीमल से यह विद्या रात में कुछ पढ़ता लिखता है कि बस सो जाता है पैर फैलाकर। प्रश्न से कजोड़ीमलजी कुछ चिन्ता में पड़ गये क्योंकि उनने अभी तक कोई ध्यान ही न दिया था। सो सकुचाते हुए बोले महाराज जी, वे रात में लिखते-पढ़ते […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 जरा सी बात से ‘महान्-त्याग’ का गुण भा गया #ज्ञानसागरजी को। सोचने लगे, एक प्रश्न पर इतना बड़ा त्याग कर दिया तो यह तो मेरे संकेतों पर जाने क्या-क्या त्याग सकता है। विश्वास हो गया ज्ञानसागरजी को आगे बोले- ठीक है। रुको। बतलाऊँगा। इन शब्दों ने प्रसन्न कर दिया विद्याधर की […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 स्नान / दर्शन पूजन / भोजन सम्पन्न हुआ अजमेर की धरती पर विद्याधर का, फिर गुरुवर के दर्शन करने चल पड़े मदनगंज किशनगढ़ की ओर। प्रथम दर्शन यहीं हुए पूज्य मुनिवर ज्ञानसागरजी के, वह भी श्री कजोड़ीमल के साथ विद्याधर के मानस में गुरु से पूर्व कजौड़ीमल जुड़ गये। एक गुरु, […]

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विद्याधर से विद्यासागर शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 कहाँमिलेगेगुरुनाथ ! कुछ ही समय बाद गाड़ी आ गई। विद्याधर रवाना हो गए। यात्रा प्रारम्भ। खिड़कियों से संसार के दृश्य देखते हुए वे जा पहुँचे राजस्थान के उस ऐतिहासिक नगर में, जिसे अजमेर कहते हैं। वह कोई जुलाई ६७ का समय था। वहाँ भी जनजन से पूजित दो […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 प्रथमश्रेणीका_यात्री : यायावर की तरह युवक दक्षिण से उत्तर की ओर देश की लंबाई लाँघता- फलाँगता पहुँच गया बाम्बे-सेन्ट्रल जहाँ से ट्रेन बदलकर अजमेर जाना है। अजमेर वाली गाड़ी अभी आई नहीं है। प्रतीक्षा करनी होगी। सामने एक कक्ष के समक्ष बोर्ड पर लिखा है – “प्रथम श्रेणी यात्रियों के लिए […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 सदलगा और समीपी परिवेश के लोग चाहे जब आ धमकते विद्याधर के पास लोगों को तो अच्छा लगता अपने विद्या का नैकट्य प्राप्त कर, परन्तु विद्या अचकचा जाते। संकोच होता कि ये मोह के मारे लोग मेरे दैनिक कार्यक्रम में किंचित् विघ्न अवश्य डाल जाते हैं। गुरु सेवा के क्षण, आगम […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 चातुर्मास स्थापना का समय सामने आ गया है। देशभूषण महाराज ससंघ किसी स्थान की ओर चल देने का विचार ले आये हैं मन में वे संघ को आदेश प्रदान करते हैं। संघ ऊंची नीची जमीन पाकर श्रवणबेलगोला से कुछ ही दूर पहुँचकर ठहर जाता है एक स्थान पर इसे ‘स्तवनिधि क्षेत्र’ […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 सेवाऔरतपस्या : देशभूषण महाराज अस्वस्थ रहने पर कभी-कभी डोली से चलते थे। उनकी डोली को कांधा देने कुछ स्वस्थ युवक तैनात किये गये थे, परन्तु आम श्रावकों की भी इच्छा रहती कि कुछ दूरी तक ही सही, उनके कंधों पर भी डोली का भार आये। यही सोचते थे उनके शिष्य । […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 मगकासूत्रधार : पिक्चर देखता है तो नाटकों की ओर खिंचाव होगा ही। “हाँ नाटक भी बहुत पसन्द करता है।” देखते देखते वह उनका पात्र भी बनने लगता है। एक नाटक में सूत्रधार का कार्य किया तो पुरस्कार जीत कर ले आया। ‘सूत्रधार’ शब्द के उच्चारण पर महावीर बाबू की आँखें चमकपड़ती […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 शुद्धि_ग्राही- महावीर प्रसाद की फिल्म वैविध्य लिये हुए हैं। वह अभी भी जारी है वे भाँति-भाँति के दृश्य देख रहे हैं। हर दृश्य में विद्या है। वे आगे देखते हैं। विद्या को गाँव या शहर का वातावरण नहीं, अपनत्व पूर्ण वातावरण पसंद है। कस्बा के रंग ढंग पसंद हैं। प्रेस किये […]

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शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍 वे पवित्र हाथ : तभी अनन्त की दृष्टि पड़ी कक्ष की दीवाल पर लगाए गए उन चित्रों पर जिन्हें विद्याधर स्वेच्छा से खरीदकर लाए थे और फ्रेम करा कर अपने हाथों जिन्हें दीवाल पर टांगा था। इन्हीं चित्रों से उनकी रुचि समझी जा सकती थी, पर कोई न समझा, सब यही […]

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