विद्याधर से विद्यासागर

*☀विद्यागुरू समाचार☀* विद्याधर से विद्यासागर

शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍

एक दिन गुरु ज्ञानसागरजी ने पूछा कजौड़ीमल से यह विद्या रात में कुछ पढ़ता लिखता है कि बस सो जाता है पैर फैलाकर।

प्रश्न से कजोड़ीमलजी कुछ चिन्ता में पड़ गये क्योंकि उनने अभी तक कोई ध्यान ही न दिया था। सो सकुचाते हुए बोले महाराज जी, वे रात में लिखते-पढ़ते होंगे, जरूर, पर मैंने अभी तक ध्यान नहीं दिया।

आप ध्यान न देंगे तो कौन देगा? विद्याधर का निवास कजौड़ीमल के गृह में नहीं था, बल्कि जहाँ ज्ञानसागरजी रहते थे, उन्हीं के पास एक अलग कमरा था, सो देखने के उद्देश्य से कजौड़ीमल वहीं रुक गये थे।

वचनों में बंधे कजौड़ीमलजी रात की प्रतीक्षा करने लगे। ज्यों ही
रात हुई वे विद्याधर के कक्ष की ओर ध्यान देने लगे। अभी ८ बजे होंगे, वे देखते हैं कि विद्याधर अपनी पोथी-किताबें समेट कर चटाई पर बैठ रहे हैं। मन ही मन कजौड़ीमल मुस्काये। अच्छा है, आठ बजे से पढ़ने बैठ रहे हैं १० बजे तक पढ़ाई कर सोने लगेंगे, दो घंटे का अध्ययन पर्याप्त भी है। कजौड़ीमलजी सांध्यकालीन जाप आदि से निवृत्त हो सो गये।

रात्रि में उनकी नींद खुली तो झट से विद्याधर की ओर देखा – अरे ये तो अभी पढ़ रहे हैं। अच्छा समझे, अभी दस नहीं बजे होगे। पुनः सो गये कजौड़ीमल।

रात अपनी गति से बीत रही थी। कजौड़ीमल अपनी गति से सो रहे थे। विद्याधर अपनी गति से पढ़ रहे थे। नगर अपनी गति से शान्त बना हुआ था। अचानक कजौड़ीमलजी की नींद फिर खुली, उन्होंने फिर विद्याधर की तरफ देखा- वे तो अभी भी पढ़ रहे थे। कजौड़ीमल सोचने लगे – शायद वे ग्यारह बजे तक पढ़ना चाहते होंगे। वे फिर सो गये।

वृद्धावस्था में जितने जल्दी नींद खुलती है, उतने ही जल्दी लग भी जाती है। कजौड़ीमलजी अपनी वृद्धावस्था का पुरस्कार इसी तरह पा रहे थे। उनकी नींद इस बार खुली तो उन्हें अपने पूर्व अन्दाजों पर विश्वास न हुआ, उठकर ब्रह्मचारी जी के पास जा पहुँचे। वे उत्साह से अध्ययन कर रहे थे। सामने घड़ी रखी थी। कजौड़ीमलजी की दृष्टि घड़ी पर पड़ी तो चिन्तित हो पड़े – अरे ब्रह्मचारी जी बंद करो पढ़ाई, एक बजने वाला है, कल परीक्षा नहीं अटकी है ?

मुस्काये विद्याधर, फिर धीरे से बोले- मेरी तो रोज परीक्षा अटकी है। -अटकी होगी। अब सो जाओ अधिक देर तक जागना अच्छा नही।

-मुस्काए विद्याधर, जैसे कजौड़ीमलजी कोई पते की बात कह रहे हो। किताबें समेटी और चटाई पर फैल गये।

कजौड़ीमल भी चुपचाप अपनी शैया पर जाकर सो गये।

पोस्ट-70…शेषआगे…!!!

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *