स्वच्छंद नहीं, स्वतंत्र बनिएः मुनि श्री आदित्य सागर जी
इंदौर@राजेश जैन दद्दू । जीवन में स्वतंत्रता आवश्यक है, स्वच्छंदता नहीं। मन, वचन, काय के विपरीत प्रवृत्ति स्वच्छंदता है और मन- वचन-काय की संयम के साथ प्रवृत्ति स्वतंत्रता है। स्वच्छंद प्रवृत्ति से मुक्त होने के लिए अपने मन को एकाग्र कर इंद्रियों को वश में करना चाहिए। स्वच्छंद प्रवृत्ति आत्मा की स्वतंत्रता में बाधक है। मन, […]
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