स्वच्छंद नहीं, स्वतंत्र बनिएः मुनि श्री आदित्य सागर जी

इंदौर@राजेश जैन दद्दू । जीवन में स्वतंत्रता आवश्यक है, स्वच्छंदता नहीं। मन, वचन, काय के विपरीत प्रवृत्ति स्वच्छंदता है और मन- वचन-काय की संयम के साथ प्रवृत्ति स्वतंत्रता है। स्वच्छंद प्रवृत्ति से मुक्त होने के लिए अपने मन को एकाग्र कर इंद्रियों को वश में करना चाहिए। स्वच्छंद प्रवृत्ति आत्मा की स्वतंत्रता में बाधक है। मन, […]

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धर्म प्रभावना के लिए इंदौर में मुनि संघ का नगर भ्रमण आज से

इंदौर@राजेश जैन दद्दू। श्री संवेगी मुनि श्रीअदित सागर और * *श्रमण मुनि श्री सागर जी महाराज धर्म प्रभावना के लिए चेन्नई के अलग-अलग-अलग मौसम और कॉलोनियों में सेट* *जंगलों के दर्शन के लिए। प्रोग्राम 17 और 18 23 27 29 और 30 विजयनगर में प्रावरण* *चर्या। संक्षेप इंदौर@राजेश जैन दद्दू । श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर […]

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जैन समाज इंदौर ने व्यक्त किया सांसद का आभार इंदौर

इन्दौर। सजल दिग्मबर जैन समाज इंदौर ने सांसद शंकर लालवानी का इस बात ले आभार व्यक्त किया है कि वे समाज के सामूहिक क्षमवाणी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर आए। दिगंबर जैन समाज समाजिक संसद के मंत्री डा ंजैनेन्द्र जैन ने इस संबंध में जारी एक आभार पत्र में कहा है किसभी के […]

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सूर्योदय के पूर्व उठने वाले ही सौभाग्यशाली-अप्रमित सागरजी श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज का भी हुआ प्रवचन

इंदौर। ऐसे लोग बहुत सौभाग्यशाली हैं जो सूर्योदय के पूर्व उठ जाते हैं और प्रभु के, गुरु के चरणों में होते हैं। वे सौभाग्यशाली नहीं है जो सूरज उगने के बाद उठते हैं। कहते हैं कि जो सूरज के जागने के बाद जागता है, उन्हें राक्षस की संज्ञा दी जाती है। कथन कड़वा जरूर है लेकिन […]

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इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती, इच्छाएं ही दुख का कारण हैं

इंदौर। व्यक्ति हमेशा जवान नहीं रहता। समय आने पर वृद्ध होता ही है लेकिन इच्छाएं कभी पूरी नहीं होतीं और हर समय जवान रहती हैं। इच्छाएं ही मनुष्य के जीवन में दुख का कारण बनती हैं। स्वयं दुखी होना श्रेष्ठ है लेकिन इच्छाएं प्रकट करके हर समय दुखी रहना श्रेष्ठ नहीं है। यह उद्गार बुधवार को […]

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कई जन्मों के संचित पुण्यों से मनुष्य जन्म में दीक्षा का अवसर मिलता है दीक्षार्थी ब्रह्मचारिणी साधना दीदी

कई जन्मों के संचित पुण्यों से मनुष्य जन्म में दीक्षा का अवसर मिलता है दीक्षार्थी ब्रह्मचारिणी साधना दीदी इंदौर हम सब का सौभाग्य है कि हमें मनुष्य जन्म मिला है।इसमें भी हमें जैन कुल मिला। जैन धर्म का साथ मिला है। जैन धर्म मिलना अच्छे गुरु का मिलना बहुत ही कई जन्मों के पुण्य से […]

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कम खाना, गम खाना, नम जाना, कोर्ट कभी न जाना यही है क्षमा वाणी

इंदौर। क्षमावाणी शब्दों से नहीं भावों से होना चाहिए और क्षमा मांगने और करने का भाव एक दिन नहीं, पूरे 365 दिन होना चाहिए एवं एक इंद्रिय, जलकायिक, वायु कायिक, वनस्पतिकायिक और अग्निकायिक जीवों से भी क्षमा मांगना चाहिए क्योंकि आज व्यक्ति इंद्रिय सुख के लिए इन सभी जीवों को बहुत कष्ट दे रहा है […]

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मुख्यमंत्री ने लिया मुनि श्री से आशीर्वाद

इंदौर। परम पूज्य 108 मुनिश्री आदित्य सागर जी ससंघ से दिगंबर जैन समाज, इंदौर के सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम में आशिर्वाद लेने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे।

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कांच मंदिर में सामूहिक क्षमावाणी आज

इंदौर। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद सेठ माणकचंद मगनीराम ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में समग्र दिगंबर जैन समाज, इंदौर की कांच मंदिर में मनाई जाने वाली परंपरागत सामूहिक क्षमावाणी आज रविवार को इतवारिया बाजार कांच मंदिर पंडाल में 4:00 बजे से मनाई जाएगी। संध्या 4:00 बजे श्रीजी का पूजन होगा। इसके पश्चात नगर में विराजित […]

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क्षमावाणी जगत कल्याणी, जिनसे बैर हो उनसे क्षमा मांगो – आदित्यसागर जी महाराज

इंदौर। समोसरण मंदिर, कंचन बाग में शनिवार को 10 दिवसीय पर्युषण पर्व एवं श्रुत आराधना साधना शिविर का समापन श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी एवं मुनि श्री सहज सागर जी के सानिध्य में सामूहिक क्षमावाणी के साथ हुआ। इस अवसर पर मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों […]

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अतिशय जैन ने की 10 दिवसीय मौन साधना

इंदौर। अतिशय जैन ने इस वर्ष पर्युषण पर्व के उपलक्ष्य में प्रथम बार श्रुत संवेगी पूज्य मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज एवं वंदनीय पूज्य आर्यिका पूर्णमति माताजी के आशीर्वाद से 10 दिवसीय पूर्णतः मौन तप त्याग की साधना की। इसके साथ बिस्तर, सोफे, पंखे, जूते-चप्पल एवं मोबाइल फोन स्पर्श एवं श्रवण का त्याग, घड़ी, आभूषण […]

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कांच मंदिर में मनेगा क्षमावाणी पर्व

इंदौर। दिगंबर जैन समाज के ह्रदय स्थल कांच मंदिर में सम्पूर्ण दिगंबर जैन मंदिरों के अध्यक्ष-मंत्रियों की उपस्थिति में रविवार को शाम पांच बजे से सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। शाम चार बजे से पचास वर्षों से पूजन करते आ रहे कांच मंदिर समाज अध्यक्ष विजय कासलीवाल, विमल पहाडि़या, सुरेश राखीवाला, अशोक जैन विधि-विधान से […]

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परिग्रह बाधक है आकिंचन्य धर्म में – मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज

इंदौर। परिग्रह हलाहल विष है, उसमें शांति नहीं है। जिस परिग्रह को तुम तुम्हारा मान रहे हो, वह तुम्हारा है ही नहीं। जितने संबंध व्यक्ति और वस्तु से बना रहे हो और उन्हें अपना मान रहे हो, वे सब दुख का कारण हैं। आकिंचन्य धर्म का पालन करना है तो पर द्रव्य और परिग्रह के प्रति […]

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लेना-देना त्याग नहीं, छोड़ना त्याग है – मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। पर्युषण पर्व के आठवें दिन समोसरण मंदिर, कंचनबाग में उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन देते हुए मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने जीवन में दान और त्याग का महत्व बताते हुए कहा कि जब तक त्याग नहीं, तब तक मोक्ष मार्ग प्रारंभ नहीं। त्याग और दान में अंतर बताते हुए मुनि श्री ने कहा […]

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संयम धारण कर संयमी बनो -मुनि आदित्यसागरजी

इंदौर। पर्युषण पर्व के पांचवे दिन समोसरण मंदिर, कंचन बाग में सोमवार को उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। इस अवसर पर मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने संयम के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि मनुष्य की यात्रा दो मार्ग पर जाती है एक प्रभुता की ओर और दूसरी पशुता की ओर। […]

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हित, मित् और प्रिय बोलकर सत्यवादी बनोः मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। जो वस्तु, स्वभाव जैसा है उसे वैसा ही कहना और स्वः पर हितकारी वचनों को बोलना सत्य धर्म है। सत्य बोलने वालों की विजय होती है एवं उसके साथ लक्ष्मी ,वैभव और यश कीर्ति भी सदा रहती है। झूठ स्वयं को भी और दूसरों को भी हानि पहुंचाता है। असत्य बोलने वाले की जग हंसाई […]

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सभी पापों का जनक लोभ है – आदित्य सागर जी

इंदौर। कषाय की चार संतान हैं- क्रोध, मान, माया और लोभ। इन चारों संतानों में लोभ (कषाय) नाम की संतान सभी पापों, दुखों की जनक है। इसलिए लोभ को पाप का बाप कहा गया है। लोभी व्यक्ति आवश्यकता से अधिक धन एवं अन्य चल- अचल संपत्ति के संग्रह की इच्छा पूर्ति के लिए येन केन प्रकारेण […]

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मन, वचन और काय की सरलता ही आर्जव धर्म है-मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। जिस व्यक्ति के बोलने, सोचने और कार्य करने में वक्रता नहीं होती अर्थात कुटिलता (मायाचारी) नहीं होती। उसे ही आर्जव धर्म कीप्राप्ति होती है। मन, वचन और काय की सरलता का नाम आर्जव धर्म है। मायाचार रहित जीवन जीना है तो दर्पण, बालक और बांसुरी के समान जीवन जियो। व्यक्ति की छवि जैसी होती है, […]

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तजो मान तभी बन पाओगे भगवान- मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। मान महा विष रूप करहि नीच गति जगत में अर्थात मान के मद में मदहोश व्यक्ति किसी को कुछ नहीं समझता। उसे ज्ञान का भी भान नहीं होता और वह इस कर्तत्व भाव में जीता है कि सबका में ही कर्ता हूं। घर संसार सब मैं ही चला रहा हूं, यह उसका भ्रम है। […]

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क्रोध के अभाव का नाम क्षमा है- मुनि श्री आदित्य सागर जी

इंदौर। क्रोध के अभाव का नाम क्षमा है। क्रोध पागलपन और एक ऐसा जहर है, जिसकी उत्पत्ति अज्ञानता से होती है और पश्चाताप से समाप्त होती है। क्रोधित व्यक्ति दूसरों के साथ स्वयं का भी विनाश करता है। क्रोध करने से संकलेषता बढ़ती है, बुद्धि और विवेक क्षीण होता है एवं क्रोध के कारण यश कीर्ति […]

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