इंदौर। समोसरण मंदिर, कंचन बाग में शनिवार को 10 दिवसीय पर्युषण पर्व एवं श्रुत आराधना साधना शिविर का समापन श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी एवं मुनि श्री सहज सागर जी के सानिध्य में सामूहिक क्षमावाणी के साथ हुआ। इस अवसर पर मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों और श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि 10 दिनों में आपने जो धर्म संस्कार प्राप्त किए और क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, आदि धर्म के 10 लक्षणों को जाना-समझा और उनका पालन किया, उसका प्रभाव आपके दैनिक जीवन, व्यवहार और व्यापार आदि में दिखाई दे, ऐसा जीवन जीने का प्रयास करें। तभी तुम्हारा पर्युषण पर्व मनाना और शिविर में साधना करना सार्थक होगा। मुनि श्री ने क्षमा वाणी का महत्व बताते हुए कहा कि क्षमावाणी जगत कल्याणी और बैर भाव को मिटाने वाली है। परस्पर में पहले क्षमा उनसे मांगें, जिनसे आपका घर ,परिवार, समाज में बैर-विरोध और विवाद हो, चाहे वे माता, पिता, पुत्र हों, मित्र हों, भाई-भाभी, पति-पत्नी, ननद-भौजाई या अन्य कोई भी हों। क्षमा जिनसे भी मांगें राग, द्वेष, कषाय और अहं को त्याग कर अंतरंग की विशुद्धि के साथ मांगें। तभी तुम्हारा सही अर्थों में मिच्छामि दुक्खड़म कहना सार्थक होगा अन्यथा वह इच्छामि दुक्खड़म माना जाएगा। इस अवसर पर शिविरार्थियों का चातुर्मास एवं शिविर संयोजक श्री आजाद जी जैन अशोक जी खासगीवाला, हंसमुख गांधी एवं अमित जैन आदि ने माल्यार्पण कर प्रशस्ति पत्र और श्रीफल देकर सम्मानित किया। धर्म सभा में काफी संख्या में समाज जन उपस्थित थे। सभी ने परस्पर में एक-दूसरे से क्षमा मांगी।
