इंदौर। पर्युषण पर्व के पांचवे दिन समोसरण मंदिर, कंचन बाग में सोमवार को उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। इस अवसर पर मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने संयम के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि मनुष्य की यात्रा दो मार्ग पर जाती है एक प्रभुता की ओर और दूसरी पशुता की ओर। संयम का पालन व्यक्ति को प्रभुता के मार्ग पर ले जाएगा और आपके जीवन को संयमित बनाएगा, इसलिए असंयम के पीछे मनुष्य पर्याय नष्ट मत करो और संयम को धारण कर संयमी बनो।
संयम की चर्चा करते हुए मुनि श्री ने कहा कि संयम धारण किए बिना परमात्मा नहीं बन पाओगे। अपने भावों पर संयम रखो एवं मन वचन और काय पर संयम का ब्रेक लगाओ। आपके भाव यदि सही मार्ग में आपको ले जाएं तो ये मोक्षमार्ग में साधक और गलत मार्ग में जाएं तो बाधक हैं। अतः स्व पर की रक्षा के लिए संयम का बंधन आवश्यक है। यह बंधन ही एक दिन आपका अभिनंदन कराएगा।
इस अवसर पर डॉक्टर जैनेंद्र जैन, कैलाश वेद, मनोज बाकलीवाल, आजाद जैन, अशोक खासगीवाला, राजेश जैन दद्दू, अरुण सेठी, राजेंद्र सोनी एवं सैकड़ों की संख्या में शिविरार्थी और समाज जन उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन हंसमुख गांधी ने किया।
