सत्य ही जीवन की परम कसौटी, जिससे होती है अंतस की परीक्षा

JAIN SANT NEWS जोबनेर

जोबनेर। आर्यिका रत्न 105 श्री नन्दीश्वरमति माताजी एवं आर्यिका 105 श्री विशेषमति माता जी के पावन सानिध्य में 1008 श्री बहत्तर जिन चैत्यालय बड़ा जैन मंदिरजी में रविवार को दशलक्षण महापर्व महामण्डल विधान पूजन में उत्तम सत्य धर्म पूजन धूमधाम से की गई। विधान मण्डल पूजा की बोलियों में शांतिधारा सौधर्म की बोली शांतिलाल महेंद्रकुमार, विनोद कुमार परिवार द्वारा, महाआरती की बोली मुन्नी देवी, मुकेशकुमार रित्विक कुमार पाटनी एवं प्रथम कलश की बोली उषा सेठी, राजेश सेठी परिवार द्वारा ली गई।

पुष्पदन्त सागर जी के निर्वाण लड्डू चढ़ाने की एवं पाद पक्षालन की बोली श्री शांतिलाल, महेंद्रकुमार विनोद कुमार बड़जात्या परिवार ने ली। आर्यिका रत्न 105 श्री नन्दीश्वरमति माता जी एवं विशेषमति माताजी ने सत्य धर्म के विशेषता समझाते हुए बताया कि दशलक्षण महापर्व का पांचवा लक्षण उत्तम सत्य धर्म है, जो यही सिखाता है सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो। क्रोध, लोभ, भय और हंसी-मजाक आदि के कारण ही झूठ बोला जाता है। जहां न झूठ बोला जाता है, न ही झूठा व्यवहार किया जाता है, वही लोकहित का साधक सत्यधर्म होता है। सत्य ही जीवन की परम कसौटी है, जिसके माध्यम से प्राणी के अन्तस की परीक्षा हो जाती है एवं शीघ्र परीक्षा परिणाम भी प्रकट हो जाता है। सत्य आत्मा की आत्मा है। सत्यरहित सारी धर्म-क्रियाएं खोखली हैं। झूठ या असत्य बहुत सारे पापों का जनक है। एक असत्य को छुपाने के लिए व्यक्ति कई असत्य बोलता है। अग्नि को रूई में छिपा लिया जाए, वह तो प्रकट होगी ही। इसी प्रकार असत्य को कितना ही ढकें, वह प्रकट हुए बिना नहीं रह सकता। सत्य को छिपाया नहीं जाता, दिखाया नहीं जाता, वह तो स्वयं दिव्य-ज्योतिर्मय सूर्य है। कितने ही असत्यरूपी बादल छा जाएं, सूर्य को ढक लें, पर आज तक बादलों द्वारा सूर्य का विनाश नहीं हो पाया। इसी प्रकार, असत्यवादी सत्यधर्म पर चाहे कितने घने बादल तैयार करें, लेकिन सत्य रूपी सूर्य का विनाश नहीं कर सकता। सत्य को नष्ट में जीना पड़े, पर वह अपनी चमक नहीं खो सकता। विजय सत्य की ही होती है, असत्य की कदापि नहीं। पताका सत्य की ही फहरायी जायेगी, असत्य की नहीं। सत्यधर्म तभी संभव है, जबकि हमारा वाणी पर संयम होगा।

सांयकाल महाआरती उषादेवी, राजेश सेठी के निवास स्थान से भव्य जुलूस के साथ गाजे-बाजे से चैत्यालय मन्दिर जी में पहुंची। महाआरती पश्चात श्री चन्द्र प्रभु दिगम्बर जैन मंदिर जी में मुनिसंघ कमेटी के तत्वावधान में एकल नृत्य कार्य्रकम का आयोजन हुआ, जिसमें अनेक श्रावकों ने प्रस्तुति दी।

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