जब मन आकर्षण की ओर जाता है, तभी लोभ जागता है-मुनि श्री विशल्य सागर

झुमरी तिलैया (कोडरमा)। जैन धर्म का सर्वोच्च पर्व दशलक्षण पर्युषण का चौथा दिन जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया। झुमरी तिलैया में चातुर्मास कर रहे महासंत जैन मुनि श्री 108 विशल्य सागर गुरुदेव ने अपनी अमृत वाणी मे भक्तजनों को कहा कि सबसे बड़ी यदि कोई गंदगी है तो लोभ है, जो […]

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उत्तम सत्य आत्मा का एक गुण है। जैसे किसी पर बनावटी आवरण पड़ा हो और वह हट जाए तो वास्तविक तस्वीर निकल आती है, वही सत्य है। जिसमें कोई मिलावटी न हो, बनावटीपन न हो, कोई लाग-लपेट न हो वह सत्य है। ऋषि- मुनियों ने कहा है- ‘सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।’ सत्य […]

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लोभ सर्व पापों को उत्पन्न करने वाला है- आचार्य श्री चैत्यसागर महाराज

आगरा। दिगम्बर जैन समाज ने दशलक्षण पर्व के चौथे दिन धर्मावलंबियों ने उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया। परम पूज्य आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज ने श्री 1008 अग्रवाल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मोती कटरा में उत्तम शौच धर्म पर बताते हुए कहा कि उत्तम शौच धर्म सब जगत में विख्यात है। यह लोभ […]

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लोभ का त्याग करना सिखाता उत्तम शौच धर्म-मुनिश्री प्रभात सागर

ललितपुर। वर्णीनगर मडा़वरा में दशलक्षण महापर्व के चतुर्थ दिवस उत्तम शौच धर्म के अवसर पर नगर में चातुर्मासरत आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य अष्टम् निर्यापक मुनिश्री अभय सागर,मुनिश्री प्रभात सागर, मुनिश्री निरीह सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में श्री महावीर विद्या विहार के परिसर में प्रात:काल श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, […]

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सम्यग्दर्शन के साथ शुचिता ही उत्तम शौच है – आचार्य अतिवीर मुनि

रेवाड़ी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज ने दशलक्षण महापर्व के अवसर पर अतिशय क्षेत्र नसिया जी में आयोजित श्री तीस चौबीसी महामण्डल विधान में धर्म के चतुर्थ लक्षण “उत्तम शौच” की व्याख्या करते हुए कहा कि शुचिता अर्थात् पवित्रता का नाम है शौच, जो कि लोभ कषाय के अभाव में प्रकट होता है। […]

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तीर्थराज पार्श्वनाथ पर्वत की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए होगी चिंतन बैठक

नई दिल्ली। शाश्वत तीर्थराज श्री पार्श्वनाथ की पर्वत श्रृंखला को इको सेंसटिव जोन घोषित करती हुई केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की राजपत्र अधिसूचना 2 अगस्त 2019 को निरस्त कराने एवं श्री सम्मेद शिखरजी पार्श्वनाथ तीर्थ क्षेत्र को ‘जैनों का पवित्रतम तीर्थ’ घोषित कराने के लिए ऑल इंडिया दिगंबर जैन महासभा की ओर से […]

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कुटिलता का त्याग ही है उत्तम आर्जव धर्म

जोबनेर। आर्यिका रत्न 105 श्री नन्दीश्वरमति माताजी एवं आर्यिका 105 श्री विशेषमति माता जी के पावन सानिध्य में 1008 श्री बहत्तर जिन चैत्यालय बड़ा जैन मंदिरजी में भाद्रपद शुक्ला छठ शुक्रवार को दशलक्षण महापर्व महामण्डल विधान पूजन में आर्जव धर्म पूजा धूमधाम से की गई। विधान मण्डल पूजा की बोलियों में शांतिधारा सौधर्म की बोली प्रवीण […]

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क्षुल्लक समर्पण साग़र जी महाराज के सानिघ्य में हो रही महती धर्म आराधना

क्षुल्लक समर्पण साग़र जी महाराज के सानिघ्य में हो रही महती धर्म आराधना देहरादून पूज्य क्षुल्लक 105 समर्पण साग़र जी महाराज के सानिघ्य में पर्युषण पर्व पर महती धर्म आराधना हो रही है। रात्रि में अभूतपूर्व सांस्क्रतिक प्रस्तुति हो रही है साथ ही सुबह अभिषेक शान्तिधारा में युवाओं का उत्साह देखते ही बनता है पूज्य […]

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फागी कस्बे सहित परिक्षेत्र के सभी जिनालयों में जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के पांचवें रोज आज उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई

फागी कस्बे सहित परिक्षेत्र के सभी जिनालयों में जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के पांचवें रोज आज उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई फागी संवाददाताराजाबाबू गोधा दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के सबसे बड़े पर्व दशलक्षण महापर्व के अन्तर्गत फागी कस्बे सहित परिक्षेत्र के चकवाडा, चोरू, नारेड़ा, मंडावरी, मेंदवास,नीमेडा, लदाना ,सुल्तानिया जैन […]

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सबसे बड़े पर्व पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के चोथे रोज आज उत्तम शौच धर्म की पूजा की गई आचरण में नम्रता तथा विचारों में निर्मलता लाना ही उत्तम शौच धर्म कहलाता है

फागी कस्बे सहित परिक्षेत्र के सभी जिनालयों में जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व के चोथे रोज आज उत्तम शौच धर्म की पूजा की गई आचरण में नम्रता तथा विचारों में निर्मलता लाना ही उत्तम शौच धर्म कहलाता है दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के सबसे बड़े पर्व दशलक्षण महापर्व के अन्तर्गत फागी कस्बे […]

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मन, वचन और काय की सरलता ही आर्जव धर्म है-मुनि आदित्य सागर जी

इंदौर। जिस व्यक्ति के बोलने, सोचने और कार्य करने में वक्रता नहीं होती अर्थात कुटिलता (मायाचारी) नहीं होती। उसे ही आर्जव धर्म कीप्राप्ति होती है। मन, वचन और काय की सरलता का नाम आर्जव धर्म है। मायाचार रहित जीवन जीना है तो दर्पण, बालक और बांसुरी के समान जीवन जियो। व्यक्ति की छवि जैसी होती है, […]

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क्षमावाणी पर्व को राष्ट्रीय क्षमा दिवस घोषित करने की मांग

ललितपुर । जैन धर्म का क्षमावाणी पर्व आपस में कटुता कम करने, सौहार्द बढ़ाने एवं शांति स्थापित करने में कारागार स्थापित हो सकता है। शास्त्रों में लिखा है क्षमा वीरस्य भूषणम् अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण है। अंतरात्मा से मांगी गई क्षमा हमें विनम्रता एवं सज्जनता के रास्ते पर ले जाती है। क्षमा के मूल में […]

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तीसरे दिन हुई उत्तम आर्जव धर्म की पूजा

आगरा। दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को जैन मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। श्री 1008 अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में परम पूज्य आचार्य श्री 108 चैत्यसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में भक्तों ने उत्तम आर्जव धर्म की पूजा और सभी मांगलिक क्रियाएं संगीतमय संपन्न कीं। […]

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छल-कपट का अभाव ही आर्जव धर्म है – आचार्य अतिवीर मुनि

रेवाड़ी। परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज ने दशलक्षण महापर्व के अवसर पर अतिशय क्षेत्र नसिया जी में आयोजित श्री तीस चौबीसी महामण्डल विधान में धर्म के तृतीय लक्षण उत्तम आर्जव की व्याख्या करते हुए कहा कि ऋजुता अर्थात् सरलता का नाम आर्जव है। मायाचारी कभी सफलता नहीं पा सकता, आत्म-कल्याण के लिए सरल […]

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मोक्षमार्ग की प्राप्ति के लिए सरल होना जरूरी – मुनि विशल्य सागर महाराज

झुमरी तिलैया (कोडरमा)। श्री दिगम्बर जैन समाज के सानिध्य में दशलक्षण पर्युषण का तीसरा दिन जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया। झुमरी तिलैया में चातुर्मास कर रहे महासंत जैन मुनि 108 विशल्य सागर गुरुदेव ने भक्तजनों को कहा कि कुटिल परिणामों का जहां पर त्याग किया जाता है, वहीं पर आर्जव धर्म […]

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दूसरों की बुराई नहीं, अपने को देखने में ही धर्मः उचय मुनि सुधासागर महाराज

ललितपुर। स्थानीय क्षेत्रपाल मंदिर में पर्वराज पर्यूषण पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि सुधासागर महाराज ने कहा है कि जीवन को ऐसा बनाएं कि कोई दो बातें कहकर हल्का हो जाए। दूसरों की बुराई नहीं, अपने को देखने में ही धर्म है। जिसे मन को समझने की इच्छा आ गई तो समझो उसमें धर्म को […]

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जीवन में कुटिलता को छोड़कर सरलता को धारण करें – आचार्य वर्द्धमान सागर महाराज

महावीर जी। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महावीर जी ने दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म के बारे दिवस बताया कि क्रोध छोड़ने से क्षमा धर्म प्रकट होता है, मान छोड़ने से मार्दव धर्म प्रकट होता है, इसी प्रकार मायाचारी छोड़ने से आर्जव धर्म प्रकट होता है। आर्जव धर्म का सरल आशय […]

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भाव के बिना पूजा व्यर्थ है- आचार्य सुंदर सागर जी महाराज

प्रतापगढ़ । केवल मंदिर में आना धर्म नहीं है। मंदिर में आकर पूजा करना क्रिया मात्र है। जब तक उसमें भाव नहीं है, यह पूजा व्यर्थ है। आपका मंदिर में आकर इस थाली से आकर उस थाली में द्रव्य चढ़ाने का कोई अर्थ नहीं है। जो भगवान निरंजन हैं, उन्हें आपके जल चढ़ाने की आवश्यकता नहीं […]

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अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है – विधानाचार्य संदीप जैन संगम अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है विधानाचार्य संदीप जैन संगम

अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है – विधानाचार्य संदीप जैन संगम अभिमान का त्याग करना ही उत्तम मार्दव धर्म है – विधानाचार्य संदीप जैन संगम* काठमांडू श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी काठमांडू नेपाल में चल रहे दश लक्षण महापर्व में विधानाचार्य संदीप जैन संगम साहित्याचार्य जी अंबाला द्वारा शायं शास्त्र […]

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मृदुता का भाव मार्दव धर्म है लोकेश शास्त्री

मृदुता का भाव मार्दव धर्म है लोकेश शास्त्री रामगंजमंडी 10 लक्षण पर्व की बेला में तृतीय दिवस को उत्तम आज आर्जव रूप में मनाया गया बेला में शहर के प्रमुख मंदिरों में अभिषेक,पूजन शान्तिधारा की गई। इस बेला में लोकेश शास्त्री द्वारा तत्वार्थ सूत्र का तीसरे अध्याय का अर्थ कर समझाया गया। साथ ही रात्रि […]

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