सम्मेद शिखर जी@राजकुमार अजमेरा। मौनपूर्वक सिंह निष्क्रीङित व्रत करने वाले विश्व के प्रथम आचार्य श्री अन्तर्मना प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री 108 परम पूज्य प्रसन्न सागर जी महाराज की मौन साधना 21 जुलाई 2021 से प्रारंभ हुई है जो 28 जनवरी 2023 तक चलेगी। आचार्य श्री 496 उपवास और 61 दिन आहार ग्रहण करेंगे। 557 दिन की मौन साधना का आज 421 दिन पूर्ण हुआ। बताते चलें कि भारत गौरव साधना महोदधि अंतर्मना आचार्य 108 श्री प्रसन्न सागर जी महाराज पारसनाथ पहाड़ के स्वर्णमय स्वर्ण भद्र कूट टोंक पर विराजमान हैं। गुरुवर ने अपनी मौन वाणी से अपने आज के उवाच में बताया कि जिस प्रकार ठंडा पानी ओर गर्म प्रेस कपड़ों की सारी सलवटें निकाल देता है, उसी प्रकार ठंडा दिमाग और सकारात्मक सोच, जीवन की सारी उलझनों को मिटा देने में समर्थ है।
अपनी मौन वाणी से अपने उवाच में उन्होंने आगे बताया कि मैं देख रहा हूं कि आजकल नफरत, घृणा, वैमनस्य,कषाय से भरे सोशल मीडिया पर किए जाने वाले पोस्ट, भीषण गर्मी और कड़ाके की सर्दी से भी ज्यादा खतरनाक हो रहीे हैं। मौसम का प्रभाव-शरीर से ज्यादा हमारी सोच और मन पर होता है। जबर्दस्त गर्मी या खूब जमा देने वाली ठंड से, लोगों का गुस्सा बेकाबू हो जाता है। सहनशीलता कम ओर वाणी-व्यवहार में जमीन और आसमान का अंतर झलकने लगता है। अनुभव कर रहा हूं कि मैं ओर मेरे युग का का मेरा धर्म, मेरा पन्थ, मेरा संप्रदाय, मेरे महाराज के भेदभाव पूर्ण पोस्टों ने आज की युवा पीढ़ी की सोच का सत्यानाश कर दिया है। चैनलों में तो और भी मेरे संत, पन्थ, सम्प्रदाय का प्रोग्राम आ रहा होता है।
उन्होंने अपनी मौन वाणी में यह भी बताया कि जहां पर जिसके मन का धर्म होता है, वहां सब कुछ अच्छा लगता है, और जहां मन के विपरीत क्रियाकाण्ड होता है, वहां कुछ भी अच्छा नहीं लगता। अरे वाह रे हमारा मापदण्ड।
आचार्य श्री 108 परम पूज्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने यह भी बताया कि आज मंदिरों और धर्मस्थलों पर साधु- संतों के समारोह में, धर्म पूजा पाठ हो ही नहीं रहा है। सिर्फ धर्म की आड़ में अच्छा खासा व्यापार चल रहा है। अहम का भाव चल रहा है। आज सबसे बेरहम दुश्मन हमारा पंथाग्रह, सन्ताग्रह, हठग्रह, दुराग्रह, संप्रदाय ओर परंपरा बन गया है जिसका रिजल्ट कोल्हू के बैल की यात्रा से कम नहीं है। यह जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा, मनीष सेठी ने दी है।
