इंदौर। तत्वज्ञान और सम्यक्त्व से शून्य लोगों को सत्य बात समझ नहीं आती, जैसे वस्तु के वस्तुत्व को जाने वबना स्यादवाद का बोध नहीं हो सकता, उसी प्रकार अहंकार में डूबे हुये लोगों को कभी तत्व का बोध नहीं हो सकता। यह प्रवचन आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने फाफाडीह स्थित सन्मति नगर, रायपुर में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि पुण्य की ऊंचाइयों में भी पहुंच कर कभी अहंकार मत करना। यदि कोई आपके पास दान लेने आए तो करुणा से भरकर उसको दान दे देना लेकिन लोभ में आकर दान मत करना, निकांक्षित भाव से दान करोगे तो पुण्य अपने आप आपकी झोली में बरसेगा। आचार्य श्री ने कहा कि पुण्य आपके साथ है तो आए हुए संकट और मौत भी टल जाती है। उन्होंने कहा कि जैसे नाना सेवकों में जब विवाद हो जाते हैं तो वह निर्णय के लिए राजा की शरण में जाते हैं। उसी प्रकार नाना प्रकार के पंथ स्यादवाद की शरण में जाकर सारे कुनय समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि दसलक्षण पर्व में आपकी आत्मा का कल्याण हो एवम् आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो।
