भोपाल की उच्च शिक्षित चार्टर्ड अकाउंटेंट ब्रह्मचारिणी खुशबू दीदी संयम पथ पर चलकर वैराग्य को धारण किया एवम आर्यका विज्ञानमति माताजी के सानिध्य में की निरंतर 16 उपवास की कठिन साधना
भोपाल
राजधानी भोपाल की 28 वर्षीय उच्च शिक्षित चार्टर्ड अकाउंटेंट खुशबू जैन ने 16 कारण के निरंतर 16 उपवास की कठिन तप साधना की वर्तमान में आर्यिका विज्ञान मति माताजी के खनियाधाना चतुर्मास मैं उनके सानिध्य में तप त्याग संयम की साधना की।
प्रवक्ता अंशुल जैन भोपाल ने बताया की निरंतर16 उपवास के बाद खुशबू दीदी का जब पारणा हुआ तब राजधानी भोपाल से अनेक भक्तो ने सम्मिलित होकर उनके कठिन तप की अनुमोदना की।
परिचय खुशबु दीदी का
समाज के प्रवक्ता अंशुल जैन ने हमे उनके बारे में बताया की भोपाल के प्रतिष्ठित जैन परिवार स्वर्गीय बागमल राजमती जैन मावा वाले परिवार की पोती और राकेश सुनीता जैन की राजदुलारी खुशबू का शुरू से ही अध्यात्म की ओर विशेष लगाव रहा। ये अपनी शिक्षा के दौरान से ही प्रतिदिन पूजा पाठ अनुष्ठान के साथ व्रत उपवास करने लगी थी।
विशेष यह कार व बुलेट चलाया करती थी
उनके विषय मे अंशुल जैन कहते है की विशेष बात यह है की वर्तमान में संयममय जीवन जीने वाली बहन खुशबू शिक्षा के दौरान कार बुलेट के साथ सभी वाहन चलाती थी। औ सदैव जनसेवा के सामाजिक और रचनात्मक कार्यों में आगे रहती थी। 2015 के राजधानी के नंदीश्वर जिनालय मैं आचार्य विद्यासागर महाराज एवं आचार्य विवेक सागर महाराज की शिष्या आर्यिका विज्ञान मति माताजी एवं संघ की 15 अन्य माताजी का चतुर्मास हुआ था चतुर्मास के दौरान उच्च शिक्षित चार्टर्ड अकाउंटेंट खुशबू दीदी ने आर्यिका 105 विज्ञानमति माताजी के सानिध्य में जैन दर्शन से जैन सिद्धांत से प्रभावित होकर स्वयं के कल्याण के लिए भौतिक सुख-सुविधाओं को त्याग कर अनेक नियम अंगीकार किए। और इस चतुर्मास में ही आर्यिका 105 विज्ञानमति माताजी का संयम का उपकरण पिछिका खुशबू दीदी और उनके परिवार राकेश सुनीता योगिता सुरभि को प्राप्त हुई।



उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और बहन खुशबू ने जीवन के मर्म को समझकर धीरे-धीरे भौतिक सुख साधनों का त्याग कर स्वयं को मोक्ष मार्ग की ओर लगा दिया। जैन के मुताबिक खुशबू दीदी की दो बहन उच्च शिक्षा के बाद विवाह उपरांत बेंगलुरु में रहती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
