वरिष्ठ सन्त मुनि श्री धर्मभूषण जी गुरुदेव का मंदसौर में समाधिमरण

JAIN SANT NEWS मंदसौर

वरिष्ठ सन्त मुनि श्री धर्मभूषण जी गुरुदेव का मंदसौर में समाधिमरण
मंदसोर
युगश्रेष्ठ तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागर जी ऋषिराज व चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरूराज के आज्ञानुवर्ती संघस्थ सुशिष्य वयोवृद्ध मुनि श्री धर्मभूषण जी गुरुदेव की मंदसौर नगरी में रविवार 11 सितंबर को रात्रि 9 बजे मुनि श्री सुखसागर जी व सुश्रावको की उपस्थिति में आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरूराज का जयपुर से मंगल उदबोधन व आशीष सन्देश पूर्वक समाधिमरण हुआ।

शाह मधोक जैन चितरी से मिली जानकारी अनुसार मुनि श्री धर्मभूषण जी ने दसलक्षण पर्व पर दस उपवास की साधना की। व एकम के दिन पारणे के पश्चात स्वास्थ को देखते हुए उन्होंने अपने गुरु जयपुर में विराजित आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरूराज से दूरसंचार के माध्यम से समाधि की स्वीकृति प्राप्त करते हुए समस्त आवश्यक नियम,संकल्प व क्षमा ग्रहण की।

गुरु आज्ञा से मन्दौर में विराजित मुनि श्री सुखसागर जी, ब्रह्म साधक व समाज के दक्ष श्रावक क्षपक मुनि श्री धर्मभूषण जी की समाधि साधना को उत्तम बनाने में सेवारत हो गए।

एक परिचय

जन्म-5 जुलाई 1947 टुंडला (उ.प्र.),

शिक्षा- अंग्रेजी,संस्कृत व हिंदी एम. ए.,

मुनि दीक्षा-9 सितंबर 1995 कुण राजस्थान में आचार्य श्री ज्ञानभूषण जी के द्वारा

मुनि श्री धर्मभूषण जी महाराज निस्पृहि थे उन्होंने अपने दीक्षा गुरु के आचार्य पद देने पर स्वीकार नही कियासन 2002 पावागढ़ सिद्धक्षेत्र यात्रा से आप तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागर जी ऋषिराज के संघस्थ हो गए उसी क्रम से आप उनके लघुनन्दन आचार्य श्री सुनीलसागर गुरूराज के संघस्थ सबसे वरिष्ठ-तपस्वी शिष्य सन्त थे।**सन 2002 से पूर्व आप जो आसन लगाने में असमर्थ रहते थे,सदैव व्हील चेयर का प्रयोग रखना पड़ता था वह तपस्वी सम्राट के शुभाशीष व मार्गदर्शन छूट गया और उनके साथ जगह जगह पद विहार किया।

ऐसे 28 वर्ष से साधनारत वरिष्ठ तपस्वी सन्त मुनि श्री धर्मभूषण जी गुरुदेव की उत्तम समाधि पर कोटिशः नमन

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *