तपस्या के द्वारा मुनि श्री विरंजन सागर महाराज ने मधुमेह को दी शिकस्त 10 दिन तक चारो प्रकार के आहार का त्याग कर रखा उपवास
सागर

इस जहा मे अगर कोई कठोर साधना को करते है तो वो मात्र दिगम्बर जैन संत है व अपनी कठोर चर्या, तप, साधना और नियमों के द्वारा इंद्रियों को वश कर पाते है
इसका साक्षात प्रमाण जब मिला जबगौराबाई दिगंबर जैन मंदिर कटरा बाजार में वर्षायोग रत जनसंत मुनिश्री विरंजन सागर महाराज 10 साल (गृहस्थ जीवन के दौरान) से मधुमेह (शुगर) रोग से ग्रसित रहे हैं। उन्होंने दसलक्षण पर्व के दौरान उन्होंने 10 दिन का निर्जला उपवास रखा। लेकिन चकित कर देने वाला जब सामने आया उपवास के समय उनकी हालत थोड़ी गिरी लेकिन उनके स्वास्थ्य में कोई फर्क नहीं देखने आया। यह दर्शाता है की यह सब संभव हो पाया संतुलित दिनचर्या, तप और साधना से।
मुनि श्री के विषय मे जानकारी
चातुर्मास मीडिया प्रभारी और मुनिश्री के शिष्य अखिल जैन ने बताते है कि विगत दस साल से मुनिश्री पर्वराज पर्यूषण में निर्जला उपवास कर कठोर साधना कर रहे हैं। मुनिश्री को मधुमेह की बीमारी होने का पता गृहस्थ जीवन के दौरान चला था। चकित कर देने वाली बात यह रही की इसके बाद भी उन्होंने दसलक्षण पर्व के दौरान व्रत करना जारी रखा है। पर्यूषण पर्व के पहले सोते समय उनका सेंपल लेकर जांच की गई थी। जांच में उनका शुगर लेवल 350 एमजी पाया गया था। इसके बाद शिष्यों ने उनसे व्रत के दौरान पानी लेने का अनुरोध किया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया। यह उनके तप और साधना का ही परिणाम है कि व्रत के दौरान उन्हें किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं हुई। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार मधुमेह पीड़ित व्यक्ति के भूखे और प्यासे रहने से काफी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
जनसंत ने निज के साथ मां का भी किया कल्याण
12 दिसंबर 1981 को दमोह जिले के छोटे से गांव सदगुवां में जन्मे विरंजन सागर ने अल्पायु में ही गुरु विराग सागर महाराज से छुल्लक और इसके बाद मुनिदीक्षा धारण की। वे गृहस्थ जीवन में प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखते थे। लेकिन संपदा का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा धारण की और अपनी दीक्षा के कुछ समय बाद ही जन्म देने वाली मां को भी आर्यिका दीक्षा दिलाकर कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।
शुगर बढ़ने से मानसिक संतुलन गड़बड़ाने की रहती है आशंका डॉ. सुमित रावत, एसोसिएट प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी विभाग बीएमसी सागर
डॉ. सुमित रावत, एसोसिएट प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी विभाग बीएमसी सागर बताते है की किसी भी मधुमेह पीड़ित व्यक्ति के लगातार भूखे और प्यासे रहने से कीटोसिस रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर घटने, चक्कर आने और मानसिक संतुलन बिगड़ने की भी आशंका रहती है। हालांकि तप, साधना और योग से इस पर नियंत्रण के अच्छे परिणाम मिलते हैं। – डॉ. सुमित रावत, एसोसिएट प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी विभाग बीएमसी सागर
मुनिश्री की दिनचर्या पर नज़र
सुबह 4 बजे नींद से जागकर तपस्या में लीन हो जाते हैं। सुबह 6 बजे नित्य क्रिया। इसके बाद प्रतिदिन 8 बजे से प्रवचन तथा 10 बजे से आहार क्रिया सम्पन्न होती है। इसके बाद फिर स्वाध्याय, सामायिक दोपहर में धार्मिक कक्षा, शाम को 6 बजे गुरु भक्ति फिर साधना।
साधनों सुविधाओं का त्याग, पैदल करते हैं विहार :
बरसात का मौसम हो या गर्मी, या फिर कितनी भी तेज ठंड हो दिगंबर वेश में रहते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए पैदल यात्रा ही करते हैं। पंखे, हीटर का उपयोग नहीं करते।
किसी ने खूब लिखा है
है मुनिवर धन्य हो तुम कितना परीषह सहते हो
सर्दी गर्मी या बरसात तुम अपने मे रहते हो
संकलन अभिषेक जैन लूहाडीया रामगंजमंडी
