महरौनी (ललितपुर)। नगर में पर्युषण पर्व पर धर्म की गंगा अनवरत बह रही है। प्रातःकालीन बेला में श्रीअजित नाथ बड़ा मंदिर, श्रीसर्वोतोभद्र तीर्थ, श्रीशान्ति नाथ और श्रीचंदाप्रभु जिनालय में भक्तिभाव से जिन अभिषेक पूजन हो रहा है। दशलक्षण पर्व के नौवें दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म पर प्रवचन करते हुए सांगानेर से आये विद्वान अंकित भैया ने कहा कि जो व्यक्ति यह चिंतन करता है कि ‘मेरी आत्मा के सिवा संसार का रंचमात्र भी बाहरी पदार्थ मेरा नहीं है’ वास्तव में वही आकिंचन्य धर्म की आराधना है। सम्यक दर्शन से ही इस धर्म का पालन हो सकता है। मिथ्यात्व व परिग्रह का त्याग ही आकिंचन्य धर्म साधना की प्रथम सीढ़ी है। आकिंचन्य धर्म की आराधना व भावना के बिना कोई भी महान नहीं बन सकता।
