जिस नगर में 5 से अधिक जिनालय होते है वह नगर तीर्थ समान होता है पंडित श्री हँसमुख शास्त्री
सनावद
श्री शान्तिवीरशिवधर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः
श्री यशवंत उदयमान नक्षत्र विश्व का सितारा होगा इसकी कल्पना किसी को नही थी। आज छोटे भूखंड पर प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज सहित सभी पूर्वाचार्यो को आधुनिक डिजिटल माध्यम से दिखाने की परिकल्पना सराहनीय एवम प्रशंसनीय है।
आज वर्तमान में जितने भी दिगम्बर साधु सुबह से शाम तक दिखते है वह आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की देन है, अनुकंपा है।



श्री हसमुख शास्त्री जी ने बताया कि पूर्व में आचार्यो का जीवन काल आचार्य पद बहुत कम समय का होने के कारण जितनी धर्म प्रभावना होना चाहिए उतनी नही हुई, इस कारणों से आचार्य श्री अजित सागर जी ने संघ समाज तथा धर्म हित मे अपना आचार्य पद लिखित आदेश से मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी को दिया।



पंडित श्री हँसमुख जी ने बताया कि सनावद 16 साधुओ की जन्म भूमि शिक्षा दीक्षा तपस्या समाधि भूमि है। जिन नगरों में 5 से अधिक जिनालय होते है , प्रसाद मंडन का शास्त्रीय प्रमाण है, कि वह नगर तीर्थ स्थान से कम नही है। आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ऐसे संत है जिनका कोई प्रोजेक्ट नही है उनके नाम पर कोई मठ गिरी या क्षेत्र नही है अमीर गरीब का भेद नही है।
देवता आचार्य श्री की रक्षा करते है मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी की 19 वर्ष की उम्र में नेत्र ज्योति चले जाना फिर प्रभु की शांति भक्ति के बाद 52 धंटे बाद नेत्र ज्योति वापस आने की सम्पूर्ण जैन समाज जयपुर साक्षी है। माता पिता की 14 संतानों में एक मात्र आचार्य श्री का जीवित रहना किसी चमत्कार से कम नही है आपके वात्सल्य उदारता का एक उदाहरण यह है की श्री श्रवणबेलगोला में भगवान श्री बाहुबली के वर्ष 1993 ,2006 ,तथा 2018 के महामस्तकाभिषेक आपके सानिध्य में हुए है। इसके पूर्व श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर से महिलाओं की कलश की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कार्यक्रम स्थल पर पहुँची। कार्यक्रम स्थल पर आमंत्रित श्रीमती सुशीला देवी पाटनी अशोक पाटनी किशनगढ़ आर के मार्बल,श्री संजय पापड़ीवाल, श्री गजु भैया,पूनम दीदी, श्री भरत जैन इंदौर श्री चिन्तामण खंडवा ने स्थल का वास्तु पूजन स्थलशुद्धि ,शिला शुद्धि पश्चात शीला ॐ यंत्र की स्थापना पंडित श्री हँसमुख शास्त्री के पूर्ण मंत्रोचार के द्वारा किया गया।



भूमिपुजन शिलान्यास के बाद
मंच पर श्रीमती सुशीला पाटनी किशनगढ़ ,श्री संजय पापड़ी वाल पंडित श्री हँसमुख शास्त्री धरियावद वात्सल्य वारिधि संघस्थ गजु भैया नमन भैया ब्रह्म पूनम दीदी दीप्ति दीदी नेहा दीदी मधुबाला दीदी भूमि प्रदाय कर्ता श्रीमती शोभा जयंत जी पंचोलिया श्री पारस श्री अविनाश जैन निर्माण कार्य के इंजीनियर श्री आशीष जैन धार सनावद को आमंत्रित किया गया श्रीमती सुशीला देवी किशनगढ़ ,श्री संजय पापड़ी वाल तथा अन्य अतिथियो द्वारा वात्सल्य वारिधि आचार्य के चित्र का अनावरण किया। व श्री गजू भैया एवम पंडित श्री हँसमुख शास्त्री ने दीप प्रज्वलन किया। संघस्थ ब्रह्म पूनम दीदी ,दीप्ति दीदी,तथा नेहा दीदी ने मंगलाचरण, भजन तथा अपनी विनयांजलि प्रस्तुत की।
आमंत्रित अतिथियों का तिलक श्रीफल ,एवम वस्त्रों से स्वागत किया। कार्यक्रम में पंचम पट्टाधीश आचार्य वर्द्धमान सागर जी के प्रति श्रीमती सुशीला पाटनी श्री संजय पापडीवाल ने अपनी विनयांजलि प्रस्तुत की।




वविभिन्न अतिथियों तथा दातारो का सम्मान किया। व जैन समाज अध्यक्ष श्री मनोज जैन ने आभार व्यक्त किया।
संचालन श्री प्रशांत जैन ने स्वागत भाषण श्री वारिश जैन एवम श्री अनुभव जैन ने दिया।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ियारामगंजमंडी
