● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 07 : : तत्त्वसार गाथा 12 – 13
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
कालाइ-लद्धि णियडा
जह जह संभवइ भव्व-पुरिसस्स।
तह तह जायइ णूणं
सुसव्व-सामग्गि मोक्खट्ठं।।12।।
चलण-रहिओ मणुस्सो
जह वंछइ मेरु-सिहरमारुहिउं।
तह झाणेण विहीणो
इच्छइ कम्मक्खयं साहू।।13।।
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