रावतभाटा । श्रमण मुनि श्री शुद्ध सागर जी महाराज का अमृतमय वर्षायोग धर्म नगरी रावतभाटा में चल रहा है। जहां मुनि श्री के सानिध्य में बुधवार को दशलक्षण पर्व का प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। धर्म सभा में श्रोताओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि हे जीव, जब भी पर्व आए हैं, हमने ढोल बजा कर उन्हें मना लिया है। ऐसे पर्व तो हम अनंत काल से मनाते आ रहे हैं।
हम दूसरों के प्रति चोट रखते हैं, यदि वही हम निज के प्रति रखते तो आज हम यहां नहीं होते। मात्र अर्घ्य चढ़ाने से हमारा जीवन क्षमामय नहीं बनता।
मुनि श्री ने कहा कि आज तक हमने जितने जीवों की हिंसा की है, साथ ही जितने जीवों का घात किया है, उन सभी जीवों से क्षमा मांगो। हे जीव, यदि तू हिंसा करेगा तो तुझे बचाने वाला कोई नहीं है। तेरा क्षमा पर्व मनाना तभी सार्थक होगा, जब तू निर अपराध जीवों की हिंसा करना बंद करेगा। मात्र अर्घ्य चढ़ाने से तथा एक-दूसरे से क्षमा मांगने से क्षमा पर्व नहीं होता। मुनि श्री ने कहा कि आज तक हमने क्रोध की जड़ नहीं खोदीं, मात्र ऊपर-ऊपर से क्षमा मांगते रहे तो तुम्हरा यह क्षमा पर्व मानना सार्थक नहीं है। यदि तुझे संसार का नाश करना है तथा मोक्ष में प्रवेश करना है तो सर्वप्रथम अपने अंदर क्रोध की जड़ को पूरी तरह निकालना होगा। यदि एक अंश भी क्रोध का तेरे अंदर रह गया तो तेरा क्षमा पर्व मानना सार्थक नहीं है। मुनि श्री ने कहा कि हमें महावीर को नहीं मानना है, हमें महावीर की मानना है। यदि तुझे क्रोध की अग्नि बुझानी है तो तुझे साम्यता को अपनाना होगा।
प्रवचन की बेला में रावतभाटा श्री समाज के सभी पुरुष महिला बालक बालिकाएं उपस्थित थे
