ध्यान करो, ध्यान से चिंतामणि रत्न की प्राप्ति होगी- आदित्य सागर जी

JAIN SANT NEWS इंदौर

इंदौर। शरीर माध्यम खलु साधनम अर्थात बहिरंग रूप से शरीर धर्म साधना का सबसे उत्तम साधन है, साध्य नहीं। शरीर के द्वारा स्वात्मा का उपकार एवं ध्यान करो। ध्यान की शक्ति से मन ,वचन और काय के समस्त रोगों, विकल्पों एवं सभी समस्याओं को दूर किया जा सकता है। ध्यान के द्वारा निर्वाण तत्व की उपलब्धि एवं चिंतामणि रत्न की प्राप्ति भी हो सकती है।

ये उदगार सोमवार को मुनि श्री आदित्यसागरजी जी महाराज ने समोसरण मंदिर, कंचन बाग में इस्टोपदेश ग्रंथ की गाथा क्रमांक 20 पर प्रवचन देते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जितने लोगों को अंतिम समय में निरोगी होकर जाना है वे नियमित रूप से एकाग्रता के साथ रोद्र और संक्लेश परिणामों से रहित होकर शुभ परिणामों के साथ ध्यान करें। पर्यूषण पर्व के 10 दिनों में धर्म-ध्यान की रूचि जागृत कर लेने से मोक्ष मार्ग खुल जाएगा।
सोमवार को संघस्थ मुनिश्री सहजसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस था। इस उपलक्ष्य में मुनि श्री के गृहस्थ जीवन के परिवारजनों ने मुनि श्री को श्रीफल समर्पित किए एवं शास्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मुनि श्री सहजसागरजी ने अपने दीक्षा गुरु आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु ने मुझ जैसे एक सामान्य व्यक्ति को शिक्षा, दीक्षा और धर्म एवं संयम के संस्कार देकर पंच परमेष्ठी की श्रेणी में ला दिया।

प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि संघ के सानिध्य एवं पर्व राज पर्यूषण के उपलक्ष्य में 31अगस्त से 9 सितंबर तक समोसरण मंदिर पंडाल में श्रुत साधना संस्कार शिविर होगा, जिसमें स्थानीय एवं बाहर के 200 शिविरार्थी सम्मिलित होकर श्रुत की साधना और धर्म की आराधना करेंगे।

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *