भगवान की भक्ति मजबूरी या मजदूरी से नहीं मजबूती के साथ करें आर्यिका विज्ञाश्री

श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अग्रवाल मंदिर निवाई में परम पूज्य भारत गौरव गणिनी गुरु मां 105 विज्ञाश्री माताजी के पावन सानिध्य में 48 दिवसीय श्री जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान में आज प्रातः अभिषेक शांतिधारा अष्टद्रव्यों से पूजा के बाद विधानमंडल की पूजा हुई जिसमें विमलचन्द जी भाणजा वालो ने पूजा अर्चना कर पुण्य प्राप्त किया | जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबु गोधा ने अवगत करवाया आज कार्यक्रम के अंतर्गत आर्यिका श्री ने भरी धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान की भक्ति तो हमने अनादि से की है लेकिन आज तक फल क्यों नहीं मिला हमने जो आज तक भक्ति की थी मजबूरी में की थी मजबूरी में की गई भक्ति से हम कभी सफल नहीं होंगे हमारा कल्याण नही होगा , कोई मजदूरी में भी करने वाले होते हैं जैसे पुजारी ,पुजारी की दृष्टि कहां है ? भगवान की पूजा या मंदिर की सेवा में नहीं बल्कि पैसे मिल रहे हैं उस पर दृष्टि है | पूर्वोचार्यो स्पष्ट लिखा है कि अरहंत की पूजा, निग्रंथों को दान हमेशा स्वयं ही करना चाहिए | आप बहुत व्यस्थ थे इसलिए पूजा करने के लिए आपने नौकर लगा दिये , मुनिराज का आहार देने के लिए भी नौकर लगा दिये , भक्ति का फल किसे मिलेगा? ऐसे में तुम मजबूरी के साथ उस मजदूर से काम करा रहे हो भक्ति किसकी कहलायी ? फल किसे मिलेगा ? उसका फल नौकर को ही मिलेगा |
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
