प्रज्ञा पदमनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 श्री विज्ञमति मति माताजी 53 वर्षवर्धन दिवस पर भाव भीनी विनयाजली
आभा से विज्ञमति माताजी
त्रिलोक कल्याणी जगत पूज्या सर्वाधिक दीक्षा प्रदात्री गणिनी आर्यिका105 विशुद्धमति माताजी की परम शिष्या समता साधिका त्याग तप की प्रतिमूर्ति बालविदुषी पट्ट गणिनी आर्यिका105 विज्ञ मति माताजी का आज हम 53 वा वर्षवर्धन दिवस बना रहे है यह सम्पूर्ण भारत वर्ष ही नहीं विश्व का गौरव है।आपका संयम त्याग सचमुच आलोकिक है।
आप यथा नाम तथा गुण को सार्थक करती है। आपका ग्रहस्थ अवस्था का नाम आभा रहा।आप वैसी ही धर्म की आभा को पल्लवित कर रही है। गणिनी गुरु माँ विशुद्धमति माताजी ने दीक्षा उपरांत आपको आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी नाम दिया आप सचमुच विशिष्ट ज्ञान की धारी है आपके द्वारा शनिगृह निवारक तीर्थंकर मुनिसुव्रत विधान
(2) आदिनाथ विधान
(3) रत्नत्रय भक्ति दीपक तीर्थंकर तीर्थंकर प्रभु के चालीसा
(4) श्री पार्श्वनाथ विधान
(5) पूजाजली
(6) आराधना की साधना
(7) आई दिवाली करे पूजन
(8) विशुद्धभक्ति गीता जिनसहस्त्रनाम विधान जैसे अनेक साहित्यों की रचना आपके द्वारा की गयी है
वही माताजी द्वारा अनेक भजनो का संकलन किया जो आज भी सभी को भक्तिमय कर देती है उनमे भजनों की संकलित एल्बम –
(1) विशुद्ध विनयांजलि
(2) रत्नत्रय भक्ति दीपक 24तीर्थंकर प्रभु चालीसा
(3) गुरु माँ विशुद्ध की ओडेगे चंदरिया
एक परिचय
जन्म नाम – कुमारी आभा जैन
जन्म स्थान -एटा उत्तर प्रदेश
पिताजी– स्वर्गीय श्री जिनेद्र प्रकाश जी जैन
माताजी– श्रीमती रेशम देवी जैन (समाधिस्थ क्षुल्लिका 105 विवर्धमतिमाताजी )
लोकिक शिक्षा – B.A
जाति – पदमावती पुरवाल
ब्रह्मचर्य व्रत – 1985 एटा मे गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी से लिया
पंचमप्रतिमा – माह सुदी दोज 1993 राजस्थान गणिनी माताजी से
सप्तम प्रतिमा व्रत 26-1-2001शिकोहाबाद गणिनी माताजी से
आर्यिका दीक्षा – 9-10-2008 कोटा राजस्थान विजयादशमीशिक्षा
दीक्षा गुरु माँ – गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी।
गणिनी आर्यिका माताजी द्वारा गुरु गुणानुवाद करते कहा था जो आज भी दिल को छु जाता ही उन्होने कहा था
इस चेतना के तीर्थ को गुरु माँ संभालिये आई हु शरण मे इसे मंदिर ढालिए
मंगलकामना
इस पुनीत अवसर हम यही कामना करते है आपका रत्नत्रय इ सी तरह फलीभूत होता रहे आप दीर्घायु हो और सदा संयम पद पर और अग्रसर हो शत शत वन्दामी !!
अभिषेक लुहाडीया रामगंजमंडी
