● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

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Day 14 : : तत्त्वसार गाथा 26 – 27
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

मल-रहिओ णाणमओ
णिवसइ सिद्धीए जारिसो सिद्धो।
तारिसओ देहत्थो
परमो बंभो मुणेयव्वो।।26।।

णोकम्म-कम्म-रहिओ
केवलणाणाइ-गुण-समिद्धो जो।
सो हं सिद्धो सुद्धो
णिच्चो एक्को णिरालंबो।।27।।

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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल :

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