इच्छाएं सीमित और कर्म संयमित हों
सनावद। तप ही कर्म निर्जरा का साधन है। संयम से हमने इच्छाओं पर काबू करके उन पर नियंत्रण कर लिया। अब उन सीमित इच्छाओं के साथ भी फल प्राप्ति के लिये संयमित कर्म करते रहें। अब यदि इच्छायें पूर्णतः समाप्त हों, उत्पन्न ही न हों, तो यह तपस्या से ही यह संभव है। सन्मति जैन ने […]
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