विलासिता व परिग्रह से युक्त संसार से विरक्त होना दुर्लभ क्रिया है*- आचार्य विनीत सागर नवदीक्षार्थी की गोद भराई जैन समाज कॉमा द्वारा आज
कामा
विलासिता भरे संसार से वर्तमान समय में विरक्त हो जाना किसी अजूबे से कम नहीं है जहां आज मनुष्य आवश्यकता से अधिक विलासिता एवं परिग्रह से युक्त नजर आता है वही जीवन को वैराग्य के मार्ग पर ले जाना बडी ही दुर्लभ क्रिया है।
आप वैराग्य धारण नहीं कर सकते हो तो आपको वैराग्य के पथिक की अनुमोदना अवश्य करनी चाहिए और अनुमोदना करने से ही आपको उस पुण्य की प्राप्ति हो जाती है उक्त उद्गार कामा के विजय मती त्यागी आश्रम में गुरु भक्ति के दौरान आचार्य विनीत सागर महाराज ने व्यक्त किए।
आचार्य ने कहा कि वैराग्य की अनुमोदना बड़े ही पुण्य के प्रताप से मिलती है। इसे आप सबको बड़े ही श्रद्धा समर्पण व हर्षोल्लास के साथ करना चाहिए। आचार्य ने स्प्ष्ट करते हुए कहा कि मानव जीवन का सार मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना है जो संसार में रहते हुए भी संसार से वैरागी हो जेनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर ही प्राप्त किया जा सकता है।
ब्रह्मचारी सार्थक भैया की गोद भराई कल:-
वर्षायोग समिति के अध्यक्ष दिनेश ठेकेदार के अनुसार नव दीक्षार्थी की गोद भराई रविवार को सांय आचार्य विनीत सागर महाराज के सानिध्य में विजय मती त्यागी आश्रम में की जाएगी।

प्रचार मंत्री संजय जैन बड़जात्या के अनुसार नव दीक्षार्थी की दीक्षा 30 अक्टूबर को मनोज धाम मोहिद्दीन पुर मेरठ में आचार्य ज्ञान भूषण महाराज के सानिध्य में होगी तो वहीं जैन समाज को उनके इस वैराग्य की अनुमोदना करने का शुभ अवसर गोद भराई के माध्यम से प्राप्त हो रहा है जिसमें सभी को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
