आर्यिका माताजी के दीक्षा दिवस पर भाव भीना नमन
आया है पावन दिन भक्ति की ओर दीक्षा जयंती पर भक्तों का है शोर अपनी आत्म साधना में रहती लीनी किंचित नही है भीनी
हमको भी रहना है गुरु चरणों की ओर आया है पावन दिन भक्ति की ओर दीक्षा जयंती पर भक्तों का है शोर
आज वो पावन दिन है जो इतिहास के स्वर्णिम पलो में लिखा गया है हम बात कर रहे हैं उन पलों की जो वर्ष 2008 में कोटा की पावन वसुंधरा पर गुमानपुरा मल्टीपरपज स्कूल में हुआ था।जब दीक्षा हुई थी तो हजारों का हजूम वहां उमड़ था मैं अपने आपको गौरवान्वित मानता हूं कि मैं उन पलों का साक्षी बना। आज वह दि मेरी स्मृति में आ गया।जब बाल विदुषी बहने संयम पथ की ओर बढ़ते हुए आर्यिका दीक्षा को आतुर थी हर कोई वैराग्य की मूर्तियों को साक्षात देख रहा था। वही टीवी चैनल के माध्यम से संपूर्ण विश्व देखकर भाव विभोर हो रहा था। यह सब गुरु मां विशुद्धमति माताजी की अनन्य साधना का परिचायक था। मुझे गौरव महसूस होता है कि इन सभी माता जी का प्रथम शिक्षा दिवस मनाने का सौभाग्य हमारे नगर रामगंजमंडी को प्राप्त हुआ। परम पूज्य पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी जो आभा दीदी से विज्ञमति माताजी के रूप में आज विद्यमान हैं उनका भी दीक्षा दिवस आज ही हम सब मिल बना रहे हैं। उन्होंने अपने मार्गदर्शन अपने उपदेशों से जन जन का कल्याण किया है। हम जैसों को ऊपर उठाने का एक अनूठा कार्य किया है हम सब गुरु मां विशुद्ध मति माताजी के अनंत अनंत उपकारी हैं जिन्होंने अपने शिष्य को एक महान साधिका का निर्माण किया।

क्या खूब संयोग है, जिनका जन्म नाम भी आभा जो आभा की तरह चमकती हुई आगे चलकर विशिष्ट ज्ञान को लेती हूं विज्ञमति माताजी के रूप में हम सभी के बीच हैं। हम यही कामना करते हैं की
दीर्घायु हो पूर्णायु हो
आप चिरायु हो
हम सब की भी उम्र लग जाए
आप शतायु हो
आप चिरसंजीवता औऱ आरोग्यता को पाएं और आपका रत्नत्रय और फलीभूत हो।
कोटि-कोटि नमन
पदमकुमार सुलोचना
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
