अन्तर्मना उवाच जिस प्रकार ठंडा पानी ओर गर्म प्रेस,कपड़ों के सारी सलवटे निकाल देती है …. उसी प्रकार ठंडा दिमाग और सकारात्मक सोच,जीवन की सारी उलझनों को मिटा देती है …
सम्मेद शिखर जी
तपस्वी मौन पूर्वक सिंहनिष्कडित व्रत करने वाले विश्व के प्रथम आचार्य श्री अन्तर्मना प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री 108 परम पूज्य प्रसन्न सागर जी महाराज।।
21 जुलाई 2021 से गुरुदेव का मौन साधना प्रारंभ हुई है जो 28 जनवरी 2023 तक रहेगी। आचार्य श्री 496 उपवास और 61 दिन आहार ग्रहण करेंगे।।
भारत गौरव साधना महोदधि अंतर्मना आचार्य 108 श्री प्रसन्न सागर जी महाराज पारसनाथ पहाड़ के स्वर्णमय स्वर्ण भद्र कूट टोंक पर विराजमान है गुरूवर ने अपनी मौन वाणी से अपनी आज की उवाच में बताया की जिस प्रकार ठंडा पानी ओर गर्म प्रेस,कपड़ों के सारी सलवटे निकाल देती है ….
उसी प्रकार ठंडा दिमाग और सकारात्मक सोच,जीवन की सारी उलझनों को मिटा देती है ….
मैं देख रहा हूं आज कल ….
नफरत घ्रणा,वैमनस्य,कषाय से भरी पोस्ट, भीषण गर्मी और कड़ाके की सर्दी से भी ज्यादा खतरनाक हो रही है।
मौसम का प्रभाव-शरीर से ज्यादा हमारी सोच और मन निर्भर करता है। जबरदस्त गर्मी या खूब जमा देने वाली ठंड से, लोगों का गुस्सा बेकाबू हो जाता है।
सहनशीलता कम, ओर वाणी-व्यवहार में जमीन आसमान का अंतर झलकने लगता है।
में अनुभव कर रहा हूं की – में ओर मेरा नस्ल का मेरा धर्म ,मेरा पन्थ, मेरा संप्रदाय ,मेरे महाराज के भेदभाव पूर्ण पोस्टो ने आज की युवा पीढ़ी की सोच का, सत्यानाश कर दिया है। चैनलो में ओर मेरे सन्त, पन्थ, सम्प्रदाय का प्रोग्राम आ रहा होता है।
शेष धर्मो का – सन्त ओर पन्थों का प्रोग्राम जाए…….मंदिर में जाये।
जहाँ पर जिसके मन का धर्म होता है,वहाँ सब कुछ अच्छा लगता है, ओर जहाँ मन के विपरीत किर्या काण्ड होता है ।
अरे वाह रे हमारा मापदण्ड।
आज मंदिरों और धर्म स्थलों पर साधु संतों के समारोह में,धर्म पूजा पाठ हो ही नही रह है।सिर्फ धर्म की आड़ में अच्छा खासा व्यापार चल रहा है अहम का भाव चल रहा है, आज सबसे बेरहम दुश्मन हमारा पंथाग्रह, सन्ताग्रह,हटग्रह, दुराग्रह, संप्रदाय ओर परंपरा बन गया है जिसका रिजल्ट कोल्हू के बैल की यात्रा से कम नहीं है
संकलन कर्ता कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा,मनीष सेठी
