ज्ञान सुधा के भंडार सुधासागर महाराज
जिनका जन्म का नाम, जिनके गुरु का नाम जिनका मुनि दीक्षा के बाद नाम सभी सार्थकता को परिलक्षित करता है पूज्य निर्यापक श्रमण सुधासागर महाराज जिनका जन्म का नाम जयकुमार जैन रहा वो नाम आज वह नाम आज धर्म को जयवन्त किये हुए है। अगर आगे चलकर हम और बात करे तो जयकुमार जैन के दीक्षा गुरु के बारे में कहे तो वह इस धरा के भगवान है,विश्व वन्दनीय आचार्य श्री विद्यासागर जो सचमुच विद्या के भंडार तो है ही उन्होनें सन्तो की शिष्य ऐसी मंडली जो गुरुकुल की परंपरा को जीवित रखे हुए। उन्होनें अपनी शिष्य मण्डली में जब आज से 40 वर्ष अपने शिष्य मंडली के शिष्य युवा जयकुमार जैन को जब मुनि दीक्षा दी नाम दिया मुनि श्री सुधासागर महाराज पूज्य मुनि श्री के तीन ही नाम एक अदभुत है इसे इस पंक्ति से समझा जा सकता है
इसरवारा की धरती का नाम है प्यारा
रूपचंद शान्तिदेवी की आँख का तारा
जहा जन्मा बालक जयकुमार न्यारा
विद्या गुरु से मुनि दीक्षा को पाया
नाम मुनि सुधासागर पाया।
यदि आज हम देखे पूज्य निर्यापक श्रमण सुधासाग़र महाराज ने इस नाम को सार्थक कर दिखाया अपनी अमृतमयी सुधा वचनों के द्वारा जन जन में धर्म को फैलाया कोई अतिशयोक्ति नही है इनकी वाणी, इनका तेज,इनका संयम, इनका त्याग अद्भुत है। इनके द्वारा श्रावकों को संस्कार के साथ धर्म से हेतु श्रावक संस्कार शिविर आहूत किये इतना ही नही संस्कार शिविर के माध्यम से श्रावकों को धर्म से जोड़कर संयम, तप, त्याग की ओर बढ़ने की सीख दी गयी। आपके द्वारा अनेक तीर्थो के उद्धार हुए है। जिसका जगत सदा ऋणी रहेगा। युवाओ को अभिषेक शान्तिधारा पूजन करने हेतु प्रेरित किया इसका यह आलम रहा जहा जहा मुनि श्री ने अपना प्रवास किया वहा वहां युवा पूजन अभिषेक करता दिखाई पड़ता है।उन्होंने गुरु के द्वारा दी गई दीक्षा को सार्थक कर दिया। जिन पर इनकी आशीष की छाव बरस जाती है उसकी किस्मत बदल जाती है।
धन्य है यह भारत भू वसुंधरा जहाँ ऐसे महासन्त का जन्म हुआ।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
