हित, मित् और प्रिय बोलकर सत्यवादी बनोः मुनि आदित्य सागर जी

JAIN SANT NEWS इंदौर

इंदौर। जो वस्तु, स्वभाव जैसा है उसे वैसा ही कहना और स्वः पर हितकारी वचनों को बोलना सत्य धर्म है। सत्य बोलने वालों की विजय होती है एवं उसके साथ लक्ष्मी ,वैभव और यश कीर्ति भी सदा रहती है। झूठ स्वयं को भी और दूसरों को भी हानि पहुंचाता है। असत्य बोलने वाले की जग हंसाई होती है, इज्जत क्षीण होती है और उसे दंडित भी होना पड़ता है। अतः जीवन में असत्य को कभी स्थान मत देना। हित मित् प्रिय बचन बोलकर सत्यवादी बनना।
यह उद्गार रविवार को उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन देते हुए मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने समोसरण मंदिर कंचनबाग में व्यक्त किए। मुनि श्री ने आगे कहा कि जीवन में कभी भी धर्म की एवं पर की रक्षा के लिए झूठ बोलना पड़े तो ऐसा झूठ, झूठ नहीं सत्य है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति स्नेह, लोभ और भय के कारण झूठ बोलता है, झूठ बोलने वाले को कभी-कभी विपत्ति का सामना भी करना पड़ता है। झूठ बोलने से मौन रहना श्रेष्ठ है।
प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू को युवा महासभा प्रदेश अध्यक्ष चिंतन वेद ने बताया कि धूप दशमी के उपलक्ष्य में सोमवार को भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा महासभा द्वारा समाज के बुजुर्गों के लिए बसों द्वारा निःशुल्क नगर के जिन मंदिरों के दर्शन कराए जाएंगे। सभी बसें बुजुर्गों को लेकर दोपहर 11 बजे समोसारण मंदिर कंचन बाग से रवाना होंगी एवं शाम को वापस समोसारण मंदिर आएंगी। यात्रा के पूर्व सभी यात्री मंदिर में विराजमान मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। सभा का संचालन हंसमुख गांधी ने किया।

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