हित, मित् और प्रिय बोलकर सत्यवादी बनोः मुनि आदित्य सागर जी
इंदौर। जो वस्तु, स्वभाव जैसा है उसे वैसा ही कहना और स्वः पर हितकारी वचनों को बोलना सत्य धर्म है। सत्य बोलने वालों की विजय होती है एवं उसके साथ लक्ष्मी ,वैभव और यश कीर्ति भी सदा रहती है। झूठ स्वयं को भी और दूसरों को भी हानि पहुंचाता है। असत्य बोलने वाले की जग हंसाई […]
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