श्रीपार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने दीक्षा स्थली श्री महावीर जी मे दी दो क्षुल्लिका दीक्षाएं
श्री महावीर जी
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी वर्ष 2022 का वर्षायोग श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र में कर रहे है
इस बेला में दिनांक 4 अगस्त 2022 को श्रीमती धीसी देवी ठोलिया उम्र 79 वर्ष का नूतन नाम क्षुल्लिका 105 श्री शांतमति माताजी नामकरण किया गया। तथा श्रीमती भगवानी देवी जयपुरिया सीकर को भी क्षुल्लिका दीक्षा दी गई।
इनका नूतन नाम क्षुल्लिका 105 श्री शीलमति माताजी किया गया। इसके पूर्व दीक्षार्थियों की शोभा यात्रा श्री वर्द्धमान सागर सभागार में पहुँची । यहाँ पर आचार्य श्री वर्द्धमान सागर चातुर्मास कमेटी तथा श्री महावीर जी महामस्तकाभिषेक समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दीक्षा समारोह कार्यक्रम सभागार में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान के कृत्रिम टोंक का निर्माण रचना का अनावरण श्रीमती शोभादेवी श्री गिरिराज सुनील पदम सुधीर पंसारी जयपुर ने किया


कार्यक्रम का मंगलाचरण संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी पूनम एवम दीप्ति दीदी ने किया व श्री पार्श्वनाथ भगवान का चित्र अनावरण श्री बंशीधर पुरनमल परिवार पंसारी द्वारा किया गया।
दीप प्रज्वलन श्री अशोक सुनील अनिल एवम सुधीर पाटनी जोबनेर तथा चातुर्मास कमेटी ने किया श्री राजकुमार जी सेठी जयपुर अध्यक्ष आचार्य श्री वर्द्धमान सागर वर्षायोग समिति ने बताया कि 1008 श्री पारसनाथ भगवान की पूजन की गई ,एवम निर्वाण लाडू पुण्यार्जक परिवार द्वारा चढ़ाया गया। श्री महावीर जी कमेटी द्वारा श्री अनुपम जी जैन एवम अतिथियों का स्वागत किया गया।
भगवान श्री महावीर स्वामी तथा प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी एवम पूर्वाचार्यो को अर्ध्य समर्पित विभिन्न नगरों से पधारी समाज द्वारा किया गया। सौभाग्यशाली परिवार की 5 महिलाओं द्वारा चोक पूरण की क्रिया की गई।
दीक्षार्थी श्रीमती धीसी देवी एवम श्रीमती भगवानी देवी ने आचार्य श्री ने दीक्षा की याचना की तथा आचार्य श्री एवम समस्त साधुओ दीदी भैया श्रावक श्राविकाओं तथा समाज से क्षमा याचना की।
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के पंचामृत से चरण प्रक्षालन का सौभाग्य श्री प्रवीण अंकेश जोबनेर परिवार को मिला। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री को शास्त्र भेंट के पुण्यार्जक श्री माणक चंद जी विनोद आशीष जयपुरिया परिवार सीकर रहे। आचार्य श्री का प्रवचन हुआ।इस बेला में आचार्य श्री के द्वारा दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किये गए तथा दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर किये गए। इसके बाद आचार्य श्री ने नामकरण किया।
श्रीमती धीसी देवी जोबनेर का दीक्षा पश्चात नूतन नाम क्षुल्लिका 105 श्री शांतमति माताजी किया गया । पुण्यार्जक परिवार जोबनेर द्वारा नूतन क्षुल्लिका जी को पिच्छी कमंडल शास्त्र एवम वस्त्र भेंट किये गए।
इसी प्रकार श्रीमती भगवानी देवी जयपुरिया सीकर का दीक्षा उपरांत नूतन नाम क्षुल्लिका 105 श्री शीलमति माताजी किया गया।
जिसमे मुनि श्री श्रेयांस सागर जी, आर्यिका 105 श्री अरहमति माताजी आर्यिका श्री श्रेयांसमति माताजी पुत्र माता तथा पत्नी तथा आर्यिका श्री कनकमति माताजी आर्यिका श्री सुशीलमति माताजी तथा क्षुल्लिका श्री कल्याणमति माताजी की दीक्षा संवत 2022 सन 1967 को श्री महावीर जी मे हुई । संवत 2025 सन 1969 को तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी ने 11 दीक्षाएं दी।
जिसमे वर्तमान के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी की भी मात्र 19 वर्ष की उम्र में सीधे मुनि दीक्षा हुई । आचार्य कल्प श्री श्रुतसाग़र जी महाराज ने भी सन 1974 में मुनि श्री समता सागर जी महाराज को मुनि दीक्षा दी।
आज प्रातः 5 बजे दोनो दीक्षार्थियों के केशलोच हो रहे थे, तब सभी वैराग्यमयी पलों से सभी द्रवित हो रहे थे। परिजनों के दोनों नेत्रों में एक नेत्र में खुशी के आंसू दूसरे नेत्र में दुख के आंसू भी थे। नेहा दीदी के भजनों से वातावरण वैराग्यमयी हो रहा था।
संघस्थ माताजी के अलावा आर्यिका105 श्री सरस्वतीमति माताजी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ने भी दीक्षार्थियों के केशलोचन किये।परिजनों एवम अन्य भक्त जिन्हें केशलोच झेलने का अवसर मिला। वह अपने को पुण्यशाली मान रहे है। दोनो दीक्षार्थियों के मंगल स्नान के बाद दोनों ने पंचामृत अभिषेक कर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी को निर्वाण लाडू समर्पित किया।
वही इसके अतिरिक्त श्री महावीरजी मे हुई अन्य दीक्षा का कोई साक्ष्य नही मिला। उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है कोई भी त्रुटि पर सुधार आमंत्रित है।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
