हमें यदि तरक्की करना है तो संपूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में बंधना ही होगा, निष्पक्ष सागर महाराज
खुरई
पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज ने राष्ट्र की एकता पर जोर दिया उन्होने कहा हमे यदि तरक्की करना है तो संपूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में बंधना ही होगा, आगे इस पर प्रकाश डालते हुए कहा की यह एकता तब ही हो सकती है, जबकि हम इसका विकेंद्रीयकरण करेंगे। उसके लिये सबसे पहले परिवार, फिर समाज, नगर, जिला, प्रदेश में सूत्रपात होगा तब जाकर हमारे राष्ट्र में एकता का प्रादुर्भाव होना संभव है।नवीन जैन मंदिर मे बोलते हुए पूज्य मुनि श्री अपना उद्बोधन दे रहे थे सटीक एवम निष्पक्ष बोलते हुए निष्पक्ष सागर मुनि श्री ने कहा एकता मात्र कागजों में लिखकर दिखाकर, बोलकर, प्रदर्शन आदि करके नहीं हो सकती, एकता के भाव तो अंतरात्मा से हृदय से हाेना जरूरी है। जब तक हम एवं हमारे राष्ट्र में एकता नहीं होगी, तब तक हम विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में नहीं आ सकते। किसी भी राष्ट्र की एकता, अखंडता ही उसकी प्रगति का सोपान हुआ करती है। उन्हाेंने कहा कि कुछ ही दिनों के बाद हम स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे, हमारे भारत के स्वतंत्र होने के हम 75वें वर्ष की अंतिम पायदान पर खड़े है। जरा विचार करो कि क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हो पाए हैं, क्या हमारी नफरताें की दीवारें गिरी हैं, क्या हम स्वालंबी बन पाए हैं, क्या हम अन्य गंभीर समस्याओं से मुक्त हो पाए हैं, नहीं।

स्वावलंबी बनने पर जोर दिया
पूज्य मुनि श्री ने स्वावलंबी बनने पर जोर दिया उन्हाेंने कहा कि जब तक हम स्वावलंबी नहीं बनेंगे, हमारी सोच सकारात्मक नहीं होगी, हमारा दृष्टिकोण रोजगार मुखी नहीं बन पाएगा, तब तक हमारे राष्ट्र की उन्नति की बात करना भी बेमानी होगी। हमें यदि अपने राष्ट्र की प्रगति करना है, तो उसकी शुरुआत भी सबसे पहले हमें अपने ‘स्वयं’ से करनी होगी। जब तक हम नहीं सुधरेंगे, तब तक दूसरों को सुधारने की बात बेमानी होगी। मात्र शासन, प्रशासन के भरोसे बैठना ठीक नहीं। हम तरक्की करेंगे तब ही हमारा समाज, नगर, जिला, प्रदेश, राष्ट्र तरक्की करेंगे। युवा-शक्ति ही संकल्पित होकर राष्ट्र के चहुंमुखी विकास में महती भूमिका निर्वाह कर सकते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
