अंहकार के कारण जीव अनंत काल के लिए दुःखो में चला जाता है

JAIN SANT NEWS अशोक नगर

अंहकार के कारण जीव अनंत काल के लिए दुःखो में चला जाता है–आर्यिका आदर्श मति माता जी

अशोकनगर
युग के आदि में जब भगवान रिषभ देव को जिन्हें जगत आदिनाथ भगवान के नाम से जानता है,से समवशरण में पूछा गया कि आपके वंश में और कितने तीर्थकर होंगे? तो प्रभु की दिव्य ध्वनि में आया कि प्रभु का पोता मारीच अन्तिम तीर्थंकर बनेग। मारीच ने जब ये सुना कि मेरे दादा कह रहे हैं कि मैं अन्तिम तीर्थंकर बनूगा। तो वह कहता है कि यहां भी राजनीति आ गई। अन्तिम क्यों पहला दुसरा क्यों नहीं।और अंहकार में चला गया अंहकार के कारण जीव अनंत दुःखो के सागर में चला जाता है। उसे पता ही नहीं चलता कि उसने ऐसा कर्म कर लिया, जो सागरो पर्यन्त संसार में भटकता रहेगा।

उक्त आश्य के उद्गार सुभाष गंज में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए आर्यिकारत्न श्री आदर्श मति माताजी ने व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि आपका जन्म ऐसे समय में हुआ जब संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज विचरण कर रहे हैं। हमें उनके दर्शन करने उनकी निकटता पाने का सौभाग्य मिला रहा है। सद्गुरु का सानिध्य भाग्य से मिलता है।

*आचार्य श्री की महा पूजा हुई*

इसके पहले धर्म सभा में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवन मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा, मध्यांचल महिला महा समिति की अध्यक्षता इन्दु गांधी, नगर अध्यक्ष कमेटी के सदस्य राजेन्द्र अमन मेडिकल ने किया।इस दौरान महिला महा समिति ने शैलेन्द्र श्रागर की मधुर ध्वनि के साथ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की महा पूजन की गई। जिसमें सभी सदस्यों को अर्घ समर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।इस दौरान भक्तों द्वारा आर्यिका संघ को शास्त्र भेंट किए गए।जीवन में किया हुआ पुरूषार्थ आगे फल देता है दुर्लभमति माताजीइसके पहले आर्यिका श्री दुर्लभ मति माता जी ने कहा कि निमित्त अकेला कुछ नहीं कर सकता, उसके लिए उपादान की आवश्यकता होती है। उपादान को जाग्रति करने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है। जीवन में किया हुआ पुरूषार्थ कभी खाली नही जाता। कभी नहीं तो आगे फलता है। कभी कभी निमित्त मिल भी जाए लेकिन उपादान कमजोर हो तो कार्य में सफलता नहीं मिली, तो सही निमित्त मिलने पर आपका उपादान जाग्रत हो तो कार्य में सफलता मिलेती चलीं जाती हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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