जय जिनेन्द्र, आज की भाव वन्दना में दर्शन करते हैं, एक ऐसे सिद्धक्षेत्र की जो प्राचीन मंदिरों का गढ़ कहलाता है।यहां लगभग 2400 वर्ष पूर्व श्रीधर केवली के चरण विराजमान हैं। पहाड़ और तलहटी में लगभग 500 वर्ष पूर्व के 73 जिन मंदिर हैं। इसमें भगवान पार्श्वनाथ और चंद्रप्रभु भगवान के दर्शन होते हैं।













◆ इन सबसे ऊपर विराजमान हैं कुण्डलपुर के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान,,,,, लगभग 1500 वर्ष पुराने मंदिर और सिंहपीठ आसन पर वे विराजमान हैं।
👉🏻 कुंडलपुर भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित एक शहर है जो दमोह से ३५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक प्रमुख जैन तीर्थ स्थल है। यहाँ तीर्थंकर ऋषभदेव की एक विशाल प्रतिमा विराजमान है।
👉🏻 कुण्डलपुर में ६३ जैन मंदिर है। उनमें से 22वाँ मंदिर काफ़ी प्रसिद्ध है। इसी मंदिर में बड़े बाबा (भगवान आदिनाथ) की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा जी बड़े बाबा के नाम से प्रसिद्ध है। प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में है और 15 फुट ऊँची हैं। यह मंदिर कुण्डलपुर का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है।
👉🏻 एक शिलालेख के अनुसार विक्रम संवत् १७५७ में यह मंदिर फिर से भट्टारक सुरेन्द्रकीर्ति द्वारा खोजा गया था। तब यह मंदिर जीर्ण शीर्ण हालत में था। तब बुंदेलखंड के शासक छत्रसाल की मदद से मंदिर का पुनः निर्माण कराया गया था। आचार्य विद्यासागर इस क्षेत्र के जीर्णोद्धार के मुख्य प्रेरणा स्रोत माने जाते है।
★ ये कथा है प्रचलित :- बताते हैं कि एक बार पटेरा गांव में एक व्यापारी बंजी करता था। वही प्रतिदिन सामान बेचने के लिए पहाड़ी के दूसरी ओर जाता था, जहां रास्ते में उसे प्रतिदिन एक पत्थर पर ठोकर लगती थी। एक दिन उसने मन बनाया कि वह उस पत्थर को हटा देगा, लेकिन उसी रात उसे स्वप्न आया कि वह पत्थर नहीं तीर्थंकर मूर्ति है।● स्वप्न में उससे मूर्ति की प्रतिष्ठा कराने के लिए कहा गया, लेकिन शर्त थी कि वह पीछे मुड़कर नहीं देखेगा। उसने दूसरे दिन वैसा ही किया, बैलगाड़ी पर मूर्ति सरलता से आ गई। जैसे ही आगे बढ़ा उसे संगीत और वाद्यध्वनियां सुनाई दीं। जिस पर उत्साहित होकर उसने पीछे मुड़कर देख लिया। और मूर्ति वहीं स्थापित हो गई।
● कहा जाता है कि मूर्ति को तोडऩे के लिए एक बार औरंगजेब ने अपनी सेना को भेजा, जैसे ही मूर्ति पर सेना ने पहला प्रहार किया, बड़े बाबा की मूर्ति की अंगुली से एक छोटा सा टुकड़ा उछलकर दूर जा गिरा। और दूध की धारा बहने लगी। इस पर सेना पीछे हट गई। लेकिन दोबारा वे आगे मूर्ति तोडऩे के लिए बढ़े तो मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया। जिससे उन्हें जान बचाकर भागना पड़ा। बड़े बाबा की मूर्ति का टूटा हुआ यह हिस्सा अब भी यहां देखा जा सकता है।अभी हाल में ही पंचकल्याणक महोत्सव में, श्रद्धालुओं ने कुण्डलपुर सिद्ध क्षेत्र पर समारोह में सम्मिलित होकर बडेबाबा का महामस्तिकाभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त किया।पहुँचने का तरीका-सड़क मार्ग- यह सभी दिशाओं से सड़कों से जुड़ा हुआ है। कुण्डलपुर के आस-पास के शहर हटा दमोह, सागर, छतरपुर, जबलपुर से नियमित बस सेवा है।एयरपोर्ट- कुण्डलपुर से लगभग १५५ किलोमीटर की दूरी पर निकटतम हवाई अड्डा, जबलपुर है।रेल- कुण्डलपुर तक पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन से 37 किलोमीटर की दूरी पर दमोह रेलवे स्टेशन है
संकलनकर्ता सुलभ जैन
