शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍
जरा सी बात से ‘महान्-त्याग’ का गुण भा गया #ज्ञानसागरजी को। सोचने लगे, एक प्रश्न पर इतना बड़ा त्याग कर दिया तो यह तो मेरे संकेतों पर जाने क्या-क्या त्याग सकता है।
विश्वास हो गया ज्ञानसागरजी को आगे बोले- ठीक है। रुको। बतलाऊँगा।
इन शब्दों ने प्रसन्न कर दिया विद्याधर की आत्मा को वे थोड़ा और आगे खिसके और पकड़ लिये मुनिवर के चरण धर दिया शीश काँपते स्वर में बोले, गुरुवर मुझे शरण में ले लो।
विद्याधर के मानस की गंगा फूटकर आँखों के रास्ते बह निकली। धर दिया हाथ ज्ञानसागरजी ने उनके सिर पर विद्याधर हो गये निहाल ।
धन्य धन्य । गुरु की पद-रज आँज ली और ठहर गये वहीं। गुरु गम्भीर भाव से बुदबुदाये-मेरे कहे अनुसार चलते रहोगे तो कुछ ही दिन में तुझे विद्यानन्दि बना दूंगा अभ्यास निरंतर बना रहे, बस!!
बाल्यकाल से ही वैयावृत्ति के नाम पर मुनियों की सेवा करने वाले विद्याधर के हाथ सेवा करने बढ़ने लगे रोज-रोज ज्ञानसागर की ओर निरंतर सेवाकर्म और अध्ययन प्रारम्भ हो गया विद्याधर का। सेवा करते अध्ययन करने लगे, अध्ययन करते सेवा करने लगे। कुछ ही माहों में उनका मनः भाव देख लोग दंग रह गये।
पोस्ट-69…शेषआगे…!!!
