











एक साथ दो भाइयों ने घर छोड़ कर संघ में प्रवेश किया निकली भव्य विनोदी
नगर को गौरवान्वित किया दीपक भ इया ने अव संघ में रहेंगे
अपने बच्चों को संस्कार देने आप बड़े लोगों को भी संस्कारित होना चाहिए –मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज
अशोक नगर – परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के संघ में आज अठारह वे बाल ब्रह्मचारी के रूप में नार्सिग प्रोफेसर परस भ इया खांदू कालोनी बांसवाड़ा और उन्नीस वे बाल ब्रह्मचारी के रूप में नगर गौरव दीपक भइया एकाउंटेंट की सर्विस छोड़ कर आज संघ में प्रवेश करने पर इनकी भव्य विनोदी श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में सुभाष गंज से निकाली गई जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सुभाष गंज मैदान पहुंची जहां गोद भराई की गई इनका सम्मान
इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल महामंत्री राकेश अमरोद कोषाध्यक्ष सुनील अखाई उपाध्यक्ष अजित बरोदिया प्रदीप तारई राजेन्द्र अमन मंत्री शैलेन्द्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा मंत्री संजीव भारल्लिय मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार आडिटर सजंय के टी थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू मिल महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अन्य प्रमुख जनों द्वारा किया।
व्यक्त किए अपने बच्चों को संस्कार देने आप बड़े लोगों को भी संस्कारित होना चाहिए
इसके पहले सुभाष गंज में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए अपने बच्चों को संस्कार देने आप बड़े लोगों को भी संस्कारित होना चाहिए कोई भी चीज अच्छी है तव में उसे आगम से तर्क से तोलता हूं जीवन में इतना अच्छा वन सकता है हमेशा आप अपने वच्चो पर सन्देह करते रहते हैं हमें अपने मन पर विश्वास होना चाहिए मैंने जो बोला है सत्य बोला है हो सकता है झूठ निकल गया हो हम तो उसे अंदर से सही समझ कर वोल आवाज लगाओ अच्छे मन से जाये जो कार्य अच्छा है सम्यक लाभ क्रिया को हजारो लोगों ने इसको अपना सकते हैं आप नव्वे प्रतिशत निश्चित हो जाये अपने वच्चो संस्कार कराकर सगुन करायें उक्त आश्य केउद्गार सुभाषगंज मैदान जिज्ञासा समाधान समारोह को सम्बोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।
अपरम्पार पुण्य कमाने के लिए अपना जीवन किसको समर्पित करें
उन्होंने कहा कि अपरम्पार पुण्य कमाने के लिए अपना जीवन किसको समर्पित करें बहुत बड़ी बात कह रहे हैं तुम वस ऐसा कोई नियम ले लेना जो पूर्व में कभी किया नहीं और आगे प्राण चले जायें तो फिर भी इस नियम का पालन करुंगा एक मातंक ने महाराज से नियम लिया कि प्राण चले जायें तो भी मैं नियम नहीं छोड़ूंगा ऐसा नियम करने वाले की परीक्षा देवता भी करने लगते हैं उस चांडाल ने कंआ जिसको धोक देती है दुनिया उसको कभी कोई धोखा नहीं देता मरता क्या नहीं करता जीवन मरण तो चलता रहता है चांडाल ने एक कुये के मांस के त्याग करने पर जिंदगी को निर्मूल करने वाले की देवताओं ने जय जय कार करने पहुंच गए धन दौलत क्या बड़ी चीज है जिसके लिए जरूर पढ़ेगी तो मैं पूरी सम्पत्ति दांव पर लगा दूंगा क्या दुनिया में ऐसे कोई वस्तु है जिसके लिए आप अपने जीवन की पूरी सम्पत्ति दांव पर लगा सकते हैं कर सकते हो संकल्प कर सकते हो पर यदि संकल्प पल गया तो देवता आप ही बनेंगे
