महामहोत्सव : 1008 श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्चाणक महा महोत्सव 17 फरवरी से 23 फरवरी तक

JAIN SANT NEWS टीकमगढ़

मुनि श्री ने अपने मांगलिक प्रवचनों में कहा कि मुनिराज सूर्य की भांति होते हैं। सूर्य यह नहीं देखता की कोई उनके निकट संबंधी है, प्रशंसक है या हमारी निंदा करने वाला है। सूर्य सभी को समान रूप से अपना प्रकाश फैलाता है। इसी तरह मुनि श्री की ओर से खुले मंच उिया गया मंत्र सर्वशक्तिमान, ताकतवर और आत्मा का कल्याण करने वाला होता है। राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…

टीकमगढ़। शहर की हृदय स्थली नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का 1008 श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महामहोत्सव 17 फरवरी से 23 फरवरी तक होगा। निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज एवं छुल्लक धैर्य सागर जी महाराज की रविवार को आगवानी हो चुकी है। यह अनुष्ठान प्रदीप भैया जी सुयश के की ओर से संपन्न कराया जाएगा। मीडिया संयोजक प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि सोमवार को सुबह 7:00 मुनि श्री ढोंगा मैदान पहुंचें एवं वहां स्थित आदिनाथ मंदिर के दर्शन भी किए। सुबह 9:00 मुनि श्री नंदीश्वर कॉलोनी स्थित मंच पर पधारें। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन गुना बालों के द्वारा किया गया। आचार्य श्री विद्यासागर एवं बड़े बाबा के चित्र का अनावरण लुइस चौधरी, जिनेंद्र जैन की ओर से किया गया। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य निखिल जैन, एवं चंचल जैन, संजय मोदी को प्राप्त हुआ।

मुनि श्री ने अपने मांगलिक प्रवचनों में कहा कि मुनिराज सूर्य की भांति होते हैं। सूर्य यह नहीं देखता की कोई उनके निकट संबंधी है, प्रशंसक है या हमारी निंदा करने वाला है। सूर्य सभी को समान रूप से अपना प्रकाश फैलाता है। मुनि श्री ने कहा कि मैं किसी को बंद कमरे में कोई मंत्र नहीं देता, जो भी दूंगा खुले मंच से दूंगा। मेरे दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। खुले मंच से दिया हुआ मंत्र सर्वशक्तिमान, ताकतवर और आपकी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा। मुनि श्री ने कहा कि दुनिया किसी को सुखी नहीं देख सकती, वे पापी दानव राक्षस होते हैं, जो दूसरों को दुखी देखकर खुश होते है। रामचंद्र जी महान थे, लेकिन उनके जीवन में भी उपसर्ग हुए हैं। उनको भी अपने जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ा है, लेकिन सत्य कभी हारता नहीं सत्य को भले ही सूली लग जाए पर सत्य कभी सूली पर नहीं चढ़ता। हमारे जीवन में भी उपसर्ग आते हैं, कठिन उपसर्ग आते हैं और उनका निर्माण करना भी कठिन होता है लेकिन सत्य उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। आप लोगों ने फिल्म देखी होगी, उमसें हीरो कई बार पिटाई खाता है। कई बार लगता है कि अब हीरो नहीं बचेगा, लेकिन हीरो अंत तक सुरक्षित रहता है पूरी फिल्म में खलनायक का तांडव नृत्य होता रहता है अंत में जीत सत्य की होती है उसी को सत्यमेव जयते कहा गया है।

मुनि श्री ने कहा कि हमें अपने जीवन में कैसा परिवर्तन करना है वस्तु में आनंद नहीं वस्तु के धर्म में आनंद है। वस्तु भिन्न चीज होती है। वस्तु का धर्म भिन्न चीज है। ज्ञान भिन्न चीज है। ज्ञान का स्वरूप भिन्न चीज है। आत्मा अलग है। आत्मा का स्वरूप अलग चीज है। हमारा ज्ञान अच्छा नहीं, हमारा मन अच्छा नहीं, हमारे संस्कार अच्छे नहीं, हम अनादि काल से संसार में अच्छाइयों की तरफ कम हैं।

कार्यक्रम में पंडित सुनील शास्त्री दीपचंद जी सनत कुमार जी कमेटी की तरफ से बाबा नायक विमल जैन डीके जैन विमल इलेक्ट्रिकल्स राजीव जैन पार्षद, सुधीर जैन अनुज जैन आदि लोग शामिल हुए। शाम को 6:00 बजे मुनि श्री मंच पर विराजमान हुए। मुनि श्री की ओर से जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम हुआ। इस जिज्ञासा समाधान में सभी लोग धर्म के संबंध में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करते हैं। मुनि श्री से प्रश्न करते हैं, मुनि श्री उत्तर के माध्यम से जिज्ञासा का समाधान करते हैं।

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