ललितपुर….
चमत्कार कहूँ….
या फिर सौभाग्य कहूँ….
कि जब आपके द्वारा किये सत कर्मों के माध्यम से जो पुण्य संचित होता है वह कभी ना कभी कुछ इस तरह उदय में आता है कि आप वह काम कर जाते हो जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की हो… और यह चमत्कार तब होता है जब आप श्रद्धा पूर्वक किसी महान आत्मा के संपर्क में आते हो, उस महान आत्मा को हम ईश्वर कहते हैं….
गुरु कहते हैं….
अपना आराध्य भी कहते हैं। कहते हो कि हम भगवान का दर्शन अपनी आंखों से कर सकते हैं लेकिन आत्मा से भगवान का जो दर्शन होता है, उस दर्शन और उस दर्शन के चमत्कार को सिर्फ वही महसूस कर सकता है जिसमें असीम श्रद्धाभाव हो । यह भी सुना था कि भगवान के गर्भ में आने से पहले बहुत से शुभ संकेत मिलने लगते हैं और कई चमत्कार भी होते है। लेकिन हमने अपनी आंखों से एक ऐसा चमत्कार देखा जिसे देखकर कुछ क्षण के लिए हमें अपनी आंखों पर तो विश्वास नहीं हुआ…..
लेकिन यह भी सत्य है कि ऐसा चमत्कार बुंदेलखंड की पावन धर्मधरा ललितपुर में हुआ है । इस चमत्कार में शायद साक्षात परमात्मा का दर्शन भी हुआ हो। इस चमत्कार को करने वाले कोई और नहीं हमारे आराध्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज है… जिनके परम आशीर्वाद और असीम अनुकंपा से ललितपुर में पंचकल्याणक महा महोत्सव चल रहा है और इस शुभ बेला में कुछ ऐसा हुआ जिसे चमत्कार ही कहा जा सकता है।




बात मंगलबार की है जब जिला चिकित्सालय में संचालित अन्नपूर्णा भोजनालय में एक ऐसा दंपत्ति पहुंचा जो दोनों आंखों से नेत्रहीन है और लगभग एक माह पहले इधर-उधर से भीख मांग कर अपनी गुजर-बसर चलाता था। ज्यादातर वह अन्नपूर्णा भोजनालय में भोजन करने आता था। लेकिन एक दिन कुछ ऐसा चमत्कार हुआ कि निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी महाराज अचानक जिला चिकित्सालय की अन्नपूर्णा भोजनालय पहुंचे जहां उन्होंने कुछ कार्यक्रम किया और उनकी चमत्कारिक दृष्टि उस दृष्टिहीन दम्पत्ति पर उस समय पड़ गई जब वह वहां पर भोजन करने आया था। मुनि श्री ने उस दंपत्ति को देखा और देखकर कुछ सोचा जिसके बाद उन्होंने उसे कुछ आशीर्वाद दिया। हालांकि उस समय किसी की समझ में कुछ नहीं आया, लेकिन गुरु की महिमा और आशीर्वाद का परिणाम उस समय देखने को मिला जब ललितपुर में भगवान का शाही महापंचकल्याणक महोत्सव चल रहा था और भगवान के गर्भ कल्याणक के दिन वह दंपत्ति फिर अचानक अन्नपूर्णा भोजनालय पहुंचा। लेकिन अब यह दंपत्ति यहां भोजन करने नहीं बल्कि एक सैकड़ा से अधिक जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने आया था। जब नेत्रहीन दंपत्ति ने अन्नपूर्णा भोजन शाला में आग्रह किया कि वह यहां पर मौजूद जरूरतमंदों को अपनी मेहनत की कमाई से भोजन कराना चाहता है तो यह बात सुनकर पहले तो सब हतप्रद रह गए। लेकिन जब उसने ने एक दिन के भोजन की निर्धारित धनराशि अन्नपूर्णा भोजनालय के संचालक को दी, तब भी यह बात भरोसे करने लायक नहीं थी कि मांग कर भोजन करने वाला आज यहां पर जरूरतमंदों को भोजन कराने आया है। लेकिन सत्य तो सत्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। शायद आपको इस बात पर भरोसा नहीं होगा लेकिन यह वास्तव में मुनि श्री की असीम अनुकंपा और तीर्थंकर बालक के गर्भ कल्याणक ही प्रताप है जो एक नेत्रहीन भिखारी ने जरूरतमंदों को भोजन कराने का काम किया।सुनील जैन ललितपुर9451832928
