दीया और बाती

JAIN SANT NEWS

दीया और बाती

दीप दान दो उनको
जिनको तम ने घेरा है।
हाथ लगाओ उनको
जिनको आफत ने घेरा है ।।

एक दीप उस चौखट पर भी
जहाँ घना अंधेरा छाया है।
जिसके पास नही है कोई
वह भी नही पराया है।।

दीपक कहता दीप बनो तुम
रह अँधियारे में ज्योति बनो तुम।
थाम सभी की बांह
अखण्ड प्रकाश बनो तुम।।

जल जाओ बाती सम
करो समर्पण इतना तुम।
सबका मंगल मेरा मंगल
भाव रहे बस हम और तुम ।।

अंतर्मन ज्योतिर्मय हो
दीप जताने आया है ।
दिये दिये कि माला कहती
सबका तम मिटाने आया है ।।

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