दीपावाली पर्व को अहिंसक रूप में मनाए
जियो औऱ जीने दो का नारा लगाते है हम
महावीर के अनुयायी कहलाते है हम
सुबह चढ़ाते है निर्वाण लाडू शाम को पटाखे चलाते है हम
छीनकर दुसरो का जीवन ये केसी दीवाली मनाते है हम
हम भगवान महावीर का2549 निर्वाण महामहोत्सव मनाने जा रहे है। प्रभु महावीर ने हमे अहिंसा,परोपकार और जीवदया का सन्देश दिया लेकिन आज के परिप्रेक्ष में हम इस पर गोर करे तो हम इन सिद्धांतों के विपरीत चलते दिखाई देते है। हम हिंसक हो गए है जी हा हम बड़े जयकारो के साथ दीपावली की बेला में निर्वाण लाडू समर्पित करते है। सन्ध्या के क्षण में जमकर पटाखे चलाते है लेकिन क्या हम ऐसा करके अहिंसा सन्देश दे पा रहे है? नही हम मुक पशुओं के जीवन को लील कर जाते है। इस पर विचार आवश्यक है यदि हम इस पर रोक लगाते है हम नही करेंगे ऐसा तभी हम महावीर के अनुयायी कहला सकते है।

हमें परोपकार के कार्य करते हुए। जीवदया गो माता की सेवा कर हम परस्परोग्रहो जीवानाम की सार्थकता को को सिद्ध कर सकते है।
दिखलाया था महावीर ने वह पथ हमने छोड़ दिया
सत्य अहिंसा धर्म पथिक से हमने नाता तोड़ लिया
प्रभु महावीर पुनः अवतार लेकर इस धरा पर आ जाएंगे इस पर एक काव्य रचना प्रचलित है
ओरो की पीर देख झलकने लगे जब नीर
जान लो अवतार लेने आ गए महावीर
दस्तक भी यदि दिल के कपाल पल जल पान करे सिंह घाट पर
ऐसे में मुस्कुराते हुए झलकने लगे नीर तो जान लो अवतार लेने आ गए महावीर
अनुराग जैन(ठग )
सरपंच बोराव राजस्थान
