पूज्य मुनि श्री संधान सागर जी महाराज के सानिध्य में बावनगजा में होगा सिद्धचक्र महामंडल विधान का अभूतपूर्व आयोजन
बावनगजा
विश्व वंदनीय आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावर् शिष्य प्रखर वक्ता संधान सागर जी महाराज एवं पूज्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज के पावन पुनीत सानिध्य में सिद्ध क्षेत्र बावन गजा पर सिद्धचक्र महामंडल विधान इसमें सिद्धों की आराधना की जाएगी या आयोजन 1 से 8 अक्टूबर तक आहूत होगा इस महान यहां अनुष्ठान को इंदौर निवासी दीपेश दीप्ति जैन द्वारा किया जा रहा है इस महामंडल विधान में सभी निमाड़ वासियों को वह अन्य साधर्मी बंधुओं को विशेष रुप से आमंत्रित किया जा रहा है।इस पावन महामंडल विधान में सभी भक्ति से सराबोर रहेंगे। इन दिनों पूज्य मुनि श्री की अभूतपूर्व साधना संयम सभी को देखने को मिल रहा है।पूज्य मुनि श्री संधान सागर जी महाराज अभूतपूर्व तप साधना कर रहे हैं।हम कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है की एक महामुनी जंगल में साधना रत रहकर जंगल में मंगल कर रहा है। मिली जानकारी अनुसार महामंडल विधान में पूज्य मुनि श्री के द्वारा दोपहर की बेला में मुकमाटी की कक्षा वह संध्या में आनंद की यात्रा अभूतपूर्व आनंद लेंगे। संध्या की बेला में महाआरती का अभूतपूर्व आयोजन होगा। इन दिनों भक्तामर की भक्ति में आराधना पूज्य मुनि श्री के सानिध्य में चल रही है। पूज्य संधान सागर जी महाराज द्वारा जो भक्तामर के 11 काव्य का शब्द अर्थ करके समझाया जा रहा है और उन्होंने इन महाकाव्यों का गुणार्थ रूप भावार्थ समझा कर अनेक नवीनतम पहलुओं को सभी के समक्ष रखा है। भक्तों की वे पुकार को सुनते ही उनकी प्यास को तृप्त कर देते हैं। पूज्य मुनि श्री कहते हैं की भक्तामर में एक एक शब्द में बीजाक्षर हैं पवित्र भावनाओं से इन बीज का वपन करने वालों को एक वटवृक्ष की तरह फल मिलता है।
जंगल की साधना
पूज्य मुनि श्री की साधना को देख हर कोई मानव चकित हो जाता है। बुधवार की बेला में नजदीक में डाक बंगला में पूज्य मुनि श्री सामयिक के लिए गए। वहा वे एक वृक्ष के नीचे बैठकर दोपहर से से शाम तक साधना रत रहे। इन साधना की मूर्ति को देख हर कोई अपने आप में दांतो तले उंगली दबा रहा था।हर कोई कह उठता है जंगल में एक योगी की साधना
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
