सज्जन पुरुष की सज्जनता को लोग तभी तक याद रखते है जब तक वह समाज में रहकर श्रैष्ठ कार्य करता है मुनि श्री

JAIN SANT NEWS विदिशा

सज्जन पुरुष की सज्जनता को लोग तभी तक याद रखते है जब तक वह समाज में रहकर श्रैष्ठ कार्य करता है मुनि श्री
विदिशा

फूल की सुगंध तभी तक याद रहती है जब तक कि कांटा नहीं चुभता। लेकिन जैसे ही कांटा चुभता है तो व्यक्ति तुरंत उस फूल की सुगंध को भूल जाता है, उसी प्रकार सज्जन पुरुष की सज्जनता को लोग तभी तक याद रखते है जब तक वह समाज में रहकर श्रैष्ठ कार्य करता है।यदि उसके अंदर कोई एक भी अवगुण सामने आ जाता है, तो लोग उसकी सज्जनता को भूल उसके अवगुणों का बखान शुरु कर देते है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज ने अरिहंत विहार जैन मंदिर में प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये। अविनाश जैन विदिशा ने बताया की मुनि श्री ने आगे कहा की व्यक्ती जितना बड़ा होता है यदि उससे एक छोटा सा भी अपराध हो जाऐ तो संसार हमेशा उपेक्षा भाव से ही देखता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि इतिहास जहा सज्जन पुरुषों को याद करता है,तो उसके साथ दुर्जनों को भी याद करता है। लोक के इतिहास में महापुरुषों के रूप में श्री राम को याद किया गया तो वही दुर्जन पुरुषों में रावण को भी याद किया गया। हर व्यक्ती को कोई न कोई किसी रूप में अवश्य याद करता है आप अपना नाम किस रुप में लिखवाना चाहोगे यह आपके ऊपर निर्भर करता है? उन्होंने कहा कि रावण बहुत ज्ञानी और भगवान श्री शांतिनाथ स्वामी का बहुत बड़ा भक्त था जीवन भर उसने भगवान की पूजा की। “रावण ने शरीर से तो सीता माता के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया था मात्र भावों से ही उसने अपराध किया लेकिन उसकी यही एक भूल ने उसे जीवन भर के लिये लोक में कलंकित कर दिया। उन्होंने कहा कि यह संसार है यहा पर उपसर्ग करने वाला भी याद रहता है,और उपसर्ग सहने वाला भी याद आता है। जहा पर भगवान पारसनाथ को याद करते है तो कमठ को भी याद किया जाता है। लोक में अच्छों की अच्छाइओं के रूप में तो बुरों को बुराई के रुप में याद किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सज्जन पुरुष कभी अपनी सज्जनता का बखान नहीं।सज्जन पुरुष की सज्जनता को लोग तभी तक याद रखते है जब तक वह समाज में रहकर श्रैष्ठ कार्य करता है। जैसे विशाल हाथी कभी नहीं काटता लेकिन वह छोटा सा मच्छर रात सोने नहीं देता, संसार में सज्जन को भी याद किया जाता है, वही दुर्जन को भी याद करता है,
जिन परिवारों में बचपन से ही बच्चों को लोक व्यवहार और संस्कार की शिक्षा दी जाती है उन परिवारों के बच्चे बिगड़ते नहीं है। वह जहा भी जाते है,वह अपना और अपने परिवार का तथा समाज का नाम ऊंचा करते है। मुनि श्री ने कहा कि दुर्जनता को सिखाने की जरुरत नहीं पड़ती, वह तो जरा सी ढील दी कि तुरंत आपके अंदर प्रवेश कर जाती है। उन्होंने कहा कि छोटी छोटी बातों मैं आजकल घरों में क्लेश सामने आते है,एक दिन भोजन में नमक कम आया तो भले ही आप थाली उठा कर न पटकें, झगड़ा न करें लेकिन कमेंट्स करे बिना नहीं मानते।

विचार करना कि’ जिन्होंने तुम्हारे लिये अपने पिता का घर छोड़ा क्या आपने यह उनके साथ यह शिष्ठता का व्यवहार किया?
यदि छोटी छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो घर को स्वर्ग बना लेंगे।

उन्होंने अलफ्रेड नोबल को याद करते हुये कहा कि जिसने डायनामाईट का निर्माण किया लेकिन जब उसे अहसास हुआ कि कि लोग मुझे मौत का सौदागर के रुप में याद करेंगे तो उसने अपने आप को परिवर्तित किया और आज दुनिया उसे शांति के लिये नोबल पुरूकार के रुप में याद करती है।

उन्होंने नन्ही चिड़िया की कहानी सुनाते हुये कहा कि एक जंगल में आग लगी तो सभी जानवर और पशु पक्षी उस जंगल को छोड़कर भागने लगे तो उसी जंगल में रहने बाली एक नन्ही चिड़िया अपनी चोंच से एक एक बूंद पानी लाकर डाल रही थी तो किसी ने कहा कि अरे मूर्ख क्या तुम्हारी इस एक बून्द पानी से इतनी भयानक आग बुझ पाऐगी?तुम भी झुलस जाओगी चलो भाग चलो तो उस नन्ही चिडिय़ा ने जबाब दिया कि भले ही में जंगल में लगी उस आग को में बुझा नहीं पाऊंगी लेकिन जब भी जंगल में लगी आग का इतिहास लिखा जाएगा तो मेरा नाम आग लगाने वालों में या उसे देखने वालों में नहीं आएगा। बल्कि वुझाने वालों में आऐगा।

उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि प्रवचन सभा में जीव दया के प्रति भावना रखने पर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष मुकेश टंडन द्वारा नौ दिनों तक मांस की दुकानों को बंद रखने पर जैन समाज द्वारा आभार प्रकट किया एवं नगर पालिका के उपाध्यक्ष संजय दिवाकीर्ती का शॉल श्री फल और तिलक लगाकर सम्मान किया गया। मुनि श्री गुरूवार को मुखर्जी नगर जाऐंगे एवं मुनिसंघ के प्रवचन8:30 से एवं आहार चर्या वहीं से संपन्न होगी।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

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