सज्जन पुरुष की सज्जनता को लोग तभी तक याद रखते है जब तक वह समाज में रहकर श्रैष्ठ कार्य करता है मुनि श्री
सज्जन पुरुष की सज्जनता को लोग तभी तक याद रखते है जब तक वह समाज में रहकर श्रैष्ठ कार्य करता है मुनि श्रीविदिशा फूल की सुगंध तभी तक याद रहती है जब तक कि कांटा नहीं चुभता। लेकिन जैसे ही कांटा चुभता है तो व्यक्ति तुरंत उस फूल की सुगंध को भूल जाता है, उसी […]
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