सूर्योदय के पूर्व उठने वाले ही सौभाग्यशाली-अप्रमित सागरजी श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज का भी हुआ प्रवचन

JAIN SANT NEWS इंदौर

इंदौर। ऐसे लोग बहुत सौभाग्यशाली हैं जो सूर्योदय के पूर्व उठ जाते हैं और प्रभु के, गुरु के चरणों में होते हैं। वे सौभाग्यशाली नहीं है जो सूरज उगने के बाद उठते हैं। कहते हैं कि जो सूरज के जागने के बाद जागता है, उन्हें राक्षस की संज्ञा दी जाती है। कथन कड़वा जरूर है लेकिन सत्य यही है। जीवन में अंधेरा करके सोने वालों इस सत्य को जान लो और मान लो कि यदि अपने जीवन में उजाला चाहते हो तो उजाला होने से पहले उठने की आदत डालो।

यह उद्गार इंदौर नगर गौरव मुनि श्री अप्रमित सागर जी महाराज ने समोसरण मंदिर कंचन बाग में प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि आज मानव सत्य को जानता है, सुनता है लेकिन सुनने और जानने के बाद भी वह उसे अपने आचरण और व्यवहार में नहीं लाता है। ऐसा जीवन जीने वालों का भविष्य उज्जवल नहीं, कष्टप्रद ही होगा। इसलिए अंतरंग की कषाय को समाप्त कर अपने अंदर सत्य भावना को जागृत करें, सत्य से ही अनंत भवों के कष्ट दूर होने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस अवसर पर धर्म सभा में श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने भी इष्टोपसदेश की गाथा पर प्रवचन दिए। सभा में मुनि श्री सहज सागर जी महाराज भी उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन हंसमुख गांधी ने किया

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