
बेंगलुरु। ‘मुझे यह कहते हुए अपार प्रसन्नता है कि तीर्थंकर भगवान के आशीर्वाद से मेरे सोलह कारण भावनाओं के व्रत पूर्ण हुए। इस बीच कई बार ऐसे कई मौके भी आए, जब मनोबल टूटने लगा। लगा कि ये सोलह कारण व्रत पूरे कैसे कर पाऊंगी। पर साधना पूरी हुई और अनुष्ठान भी निर्विघ्न पूरा हो गया।’ यह बात बेंगलुरु की नवीना दिलीप जैन ने श्रीफल न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कही। नवीना दिलीप जैन दम्पति अपनी इस साधना का श्रेय जिनेन्द्र भगवान को देते हैं।

नवीना जैन ने यह भी कहा कि इन दिनों में सुख की जो अनुभूति हुई, उसे शब्दों में समेटना असम्भव सा लग रहा है। सोचा भी न था कि ये पूर्ण हो जाएगा। दस दनों में लगातार अभिषेक भी किया। सोलह कारण भावनाओं की पूजा भी की । इन्द्रध्वज विधान भी हुआ। मुनि अमरकीर्ति और मुनि अमोघकीर्ति जी के सान्निध्य में हुए इस आयोजन में इन्द्रध्वज महामंडल विधान भी हुआ। नवीना जी ने यह भी कहा कि रोजाना अर्घ्य चढ़ाया, अभिषेक, जिनालयों के दर्शनों के साथ नित्य सोलह कारण पूजा की। यह तो सिद्धत्व का बीज है। भक्ति से पाप नष्ट होते हैं। उपवास की साधना तो भगवान महावीर की साधना है। मनुष्य जन्म लेकर आत्मकल्याण के हित में उठाया गया व्रत- उपवास का यह कदम आत्मा के उर्ध्वारोहण की नींव है। सोलह कारण भावना सातिशय पुण्य का कारण है। निकट भव्य जीव ही तपस्या-साधना-सहर्ष कर सकते हैं। सोलह कारण भावनाओं का यह व्रत भाद्रपद कृष्णा प्रतिपदा से प्रारंभ हुआ था। 12 सितम्बर को उन्होंने इसकी पारणा की।

